तमिलनाडु में बड़ा सियासी उलटफेर, विजय को रोकने के लिए साथ आ सकते हैं DMK और AIADMK

Tamil Nadu News: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है। राजनीति में नई एंट्री करने वाले अभिनेता थलापति विजय को सत्ता से दूर रखने के लिए दो धुर विरोधी पार्टियां साथ आ सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के बीच सरकार बनाने को लेकर गुप्त बातचीत चल रही है। अगर यह गठबंधन होता है, तो यह राज्य के 54 साल के राजनीतिक इतिहास में एक अभूतपूर्व बदलाव होगा।

बहुमत से दूर थलापति विजय

तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) 108 सीटें जीतकर राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनी है। हालांकि, सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 118 का है। विजय ने सात मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का दावा पेश किया था। लेकिन, राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर उनके समर्थन पत्र से संतुष्ट नहीं हुए। राज्यपाल ने उन्हें 118 विधायकों का स्पष्ट समर्थन साबित करने को कहा है। इसके बाद विजय का शपथ ग्रहण समारोह फिलहाल टल गया है।

द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच गुप्त बातचीत

चेन्नई के सियासी गलियारों में द्रमुक और अन्नाद्रमुक के हाथ मिलाने की चर्चा तेज है। दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेता इस संभावित गठबंधन पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। चुनाव में द्रमुक को 59 और अन्नाद्रमुक को 47 सीटें मिली हैं। अगर दोनों पार्टियां मिल जाती हैं, तो उनके कुल विधायकों की संख्या 106 हो जाएगी। विजय की राह मुश्किल करने के लिए दोनों पार्टियां दशकों पुरानी दुश्मनी भुलाने को तैयार दिख रही हैं।

छोटे दलों पर टिकी दोनों गुटों की नजर

द्रमुक और अन्नाद्रमुक के साथ आने के बावजूद गठबंधन के पास बहुमत नहीं होगा। 106 विधायकों के साथ वे जादुई आंकड़े से 12 सीट पीछे रहेंगे। ऐसे में सरकार बनाने के लिए छोटे दलों की भूमिका बेहद अहम हो गई है। वीसीके और वामपंथी दलों ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। दूसरी तरफ, मुस्लिम लीग ने भी विजय को समर्थन देने से साफ इनकार कर दिया है। ऐसे में छोटे दल ही सत्ता की चाबी साबित होंगे।

कांग्रेस के रुख से इंडिया गठबंधन में दरार

चुनाव नतीजों के बाद इंडिया गठबंधन में दरार आई है। कांग्रेस ने पुराने सहयोगी द्रमुक को छोड़कर विजय की पार्टी टीवीके का समर्थन किया है। द्रमुक ने कांग्रेस के इस कदम को पीठ में छुरा घोंपना बताया है। नेताओं का कहना है कि द्रमुक ने हमेशा कांग्रेस का साथ दिया है। कांग्रेस के इस फैसले ने राज्य की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। इसी बीच, राज्यपाल ने राज्य की पुरानी विधानसभा को भंग कर दिया है।

54 साल पुरानी है दोनों की राजनीतिक दुश्मनी

अन्नाद्रमुक का गठन साल 1972 में हुआ था। भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद तत्कालीन द्रमुक अध्यक्ष एम करुणानिधि ने एमजी रामचंद्रन को पार्टी से निकाल दिया था। इसके बाद एमजीआर ने अन्नाद्रमुक की स्थापना की थी। इसी विभाजन ने दोनों द्रविड़ पार्टियों के बीच कड़वी दुश्मनी की नींव रखी। पिछले पांच दशकों से राज्य की सत्ता इन्हीं दोनों पार्टियों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। अब विजय के उभार ने दोनों को साथ आने पर मजबूर कर दिया है।

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