Delhi News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव समाप्ति की ओर बढ़ रहे हैं और इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष पद की दौड़ ने तेज़ी पकड़ ली है। मौजूदा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का कार्यकाल पूरा हो चुका है। अंदरूनी सूत्र बता रहे हैं कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अब नए चेहरे पर विचार कर रहा है। केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और एनडीएमसी उपाध्यक्ष कुलजीत चहल इस रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं। हालांकि ऐतिहासिक जीत के कारण सचदेवा को दोबारा मौका मिलने की भी प्रबल संभावना है।
वीरेंद्र सचदेवा का तीन वर्षीय कार्यकाल हुआ पूरा
वीरेंद्र सचदेवा ने मार्च के महीने में दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष के पद पर तीन साल पूरे कर लिए। पार्टी के संविधान के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष का एक कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। कोई भी व्यक्ति लगातार अधिकतम दो कार्यकाल तक ही इस जिम्मेदारी पर रह सकता है। सचदेवा के नेतृत्व में पार्टी ने पिछले साल फरवरी के विधानसभा चुनावों में 70 में से 48 सीटों पर जीत दर्ज की। इस प्रदर्शन ने 27 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी का मार्ग प्रशस्त किया।
पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद लगेगी अंतिम मुहर
पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के अनुसार, राष्ट्रीय नेतृत्व फिलहाल पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर नज़र गड़ाए हुए है। बुधवार को दूसरे और अंतिम चरण का मतदान होने के बाद चार मई को परिणाम आ जाएंगे। इसके ठीक बाद दिल्ली इकाई के शीर्ष पद पर औपचारिक फैसला लेने की तैयारी है। सचदेवा को पहली बार दिसंबर 2022 में कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद मार्च 2023 में उन्हें पूर्णकालिक अध्यक्ष पद की कमान सौंप दी गई।
कुलजीत चहल और हर्ष मल्होत्रा बने सबसे मजबूत दावेदार
कुलजीत चहल और हर्ष मल्होत्रा इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद के उपाध्यक्ष कुलजीत चहल जाट समुदाय से आते हैं। उन्हें राष्ट्रीय नेतृत्व का बेहद करीबी माना जाता है और वह ‘नमो ऐप’ के राष्ट्रीय संयोजक की भूमिका भी निभा रहे हैं। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा पंजाबी समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। संगठन के सूत्र बताते हैं कि मल्होत्रा को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का भी लगातार समर्थन हासिल है। शीर्ष पद के लिए नाम पर चर्चा करते समय इन दोनों नेताओं की पृष्ठभूमि को अहमियत दी जा रही है।
गुर्जर कार्ड खेलकर जय प्रकाश भी मैदान में उतरे
दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष की रेस में एक और नाम तेजी से उभर कर सामने आया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता जय प्रकाश गुर्जर समुदाय से आते हैं। सूत्रों का कहना है कि अगर पार्टी जाट या पंजाबी समुदाय से हटकर कोई संतुलन साधने की कोशिश करती है तो जय प्रकाश पर दांव खेला जा सकता है। इस बदलाव से पार्टी दिल्ली के सामाजिक समीकरणों को एक नया संदेश देना चाहेगी। हालांकि पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने साफ कहा कि समुदाय विशेष का चयन पूरी तरह से राष्ट्रीय नेतृत्व के विवेक पर निर्भर करेगा।
क्या ऐतिहासिक जीत के बाद भी बदलेगा सचदेवा का पत्ता?
पार्टी के भीतर नेताओं का एक मजबूत धड़ा मानता है कि सचदेवा को दूसरा कार्यकाल मिलना लगभग तय है। इसके पक्ष में सबसे बड़ा तर्क पिछले चुनावों का रिकॉर्ड है। उनकी अगुआई में बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी सातों सीटें जीतकर अपना पुराना प्रदर्शन दोहराया। इसके बाद विधानसभा में मिली प्रचंड सफलता ने संगठन में उनका कद और बढ़ा दिया। पंजाबी समुदाय के इस चेहरे को पार्टी के भरोसेमंद संगठनकर्ता के तौर पर देखा जाता है। अब सबकी निगाहें चार मई के बाद आने वाले फैसले पर टिक गई हैं।


