Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला जमीन घोटाला सामने आया है। पैंतालीस करोड़ रुपये की कीमती जमीन को महज पचहत्तर लाख रुपये में खरीद लिया गया। इस सनसनीखेज मामले में अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने जांच के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। अब दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें चौदह दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है।
फर्जी दस्तावेजों से मदनपुर खादर में हड़पी करोड़ों की जमीन
ईडी की जांच में इस जमीन घोटाले की पूरी परतें खुल गई हैं। जवाद अहमद सिद्दीकी पर फर्जी दस्तावेजों का चालाकी से इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगा है। उन्होंने दिल्ली के मदनपुर खादर गांव में 1.14 एकड़ जमीन को अवैध रूप से हड़प लिया। बाजार में इस जमीन की असली कीमत लगभग पैंतालीस करोड़ रुपये आंकी गई है। लेकिन सरकारी कागजों में हेरफेर करके इसे केवल पचहत्तर लाख रुपये में खरीदा हुआ दिखाया गया।
दस दिन की कस्टडी के बाद कोर्ट ने भेजा तिहाड़ जेल
प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने सिद्दीकी को चौबीस मार्च 2026 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद लगातार दस दिनों तक ईडी ने उन्हें अपनी हिरासत में रखकर कड़ी पूछताछ की। फिर चार अप्रैल 2026 को आरोपी चेयरमैन को दिल्ली की अदालत में पेश किया गया। एडिशनल सेशन जज शीतल चौधरी प्रधान की अदालत ने उन्हें सत्रह अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है।
छात्रों की फीस से बनाई अपनी निजी करोड़ों की संपत्ति
अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी का विवादों से बहुत पुराना नाता है। उन पर छात्रों की फीस और ट्रस्ट के फंड का गलत इस्तेमाल करने का भी आरोप है। उन्होंने इस पैसे का उपयोग अपनी निजी संपत्ति बनाने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया। इसके अलावा उन्होंने छात्रों को गुमराह करने के लिए एक बड़ी साजिश रची। उन्होंने फर्जी तरीके से यूनिवर्सिटी को यूजीसी और नैक से मान्यता प्राप्त होने का झूठा दावा किया था।
लाल किला ब्लास्ट मामले से भी जुड़े हैं यूनिवर्सिटी के तार
चेयरमैन सिद्दीकी इससे पहले भी पुलिस के हत्थे चढ़ चुके हैं। साल 2025 में भी एक अन्य मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी। इस यूनिवर्सिटी का नाम नवंबर 2025 के दिल्ली ब्लास्ट मामले से भी जुड़ चुका है। लाल किला ब्लास्ट मामले में यूनिवर्सिटी के कुछ डॉक्टरों की संदिग्ध भूमिका सामने आई थी। लगातार सामने आ रहे इन गंभीर मामलों ने सिद्दीकी और उनके संस्थान की विश्वसनीयता पर बहुत बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।


