राजस्थान में 859 थानेदारों की छिनी वर्दी! हाईकोर्ट ने रद्द की SI भर्ती परीक्षा 2021, टूट गए युवाओं के सपने

Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने बहुचर्चित सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 को पूरी तरह रद्द कर दिया है। अदालत के इस बड़े फैसले से 859 चयनित थानेदारों की वर्दी छिन गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस.पी. शर्मा की खंडपीठ ने एकलपीठ के पुराने फैसले पर अपनी पक्की मुहर लगा दी है। अब चयनित उम्मीदवारों और राज्य सरकार की सभी अपीलें खारिज कर दी गई हैं। अदालत ने माना कि इस परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक जैसी गंभीर अनियमितताएं हुई थीं।

पेपर लीक ने छीना लाखों ईमानदार युवाओं का हक

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया है। अदालत ने कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठने पर भर्ती रद्द करना ही सही विकल्प है। पुलिस जांच में पेपर लीक के पक्के प्रमाण मिले हैं। अदालत ने एकलपीठ के तर्क को बिल्कुल सही माना है। दूषित चयन प्रक्रिया ने लाखों ईमानदार उम्मीदवारों का हक मारा है। इसलिए परीक्षा की शुचिता भंग होने पर यह कड़ा फैसला लेना बहुत जरूरी था।

उम्मीदवारों को भविष्य में मिलेगी आयु सीमा में छूट

भर्ती रद्द होने से हजारों युवाओं को बड़ा झटका लगा है। लेकिन अदालत ने उम्मीदवारों के हितों का पूरा ध्यान रखा है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि भविष्य में जब भी यह परीक्षा होगी, पुराने उम्मीदवारों को आयु सीमा में छूट मिलेगी। इससे उन युवाओं को दोबारा मौका मिलेगा जो कानूनी लड़ाई में ओवर-एज हो गए हैं। इसके अलावा अदालत ने आयोग के सदस्यों के खिलाफ लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान को भी रद्द कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद आया बड़ा फैसला

एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को इस भर्ती को रद्द किया था। इसके बाद चयनित उम्मीदवार न्याय के लिए खंडपीठ पहुंच गए थे। यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी गया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को तीन महीने में अंतिम फैसला लेने का आदेश दिया था। आज हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि परीक्षा प्रक्रिया में भारी खामियां मौजूद थीं। इन बड़ी खामियों को अब किसी भी तरह से सुधारना संभव नहीं रह गया था।

एसओजी जांच में सामने आया था भ्रष्टाचार का बड़ा जाल

इस भर्ती का सफर तीन फरवरी 2021 को शुरू हुआ था। कुल 859 पदों के लिए करीब आठ लाख युवाओं ने आवेदन किया था। इनमें से तीन लाख अस्सी हजार उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे। एसओजी की जांच में सामने आया कि भर्ती में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी थीं। परीक्षा के दौरान ही धांधली के गंभीर आरोप लगे थे। आरपीएससी सदस्य रामूराम राईका और बाबूलाल कटरा की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले ने बहुत ज्यादा तूल पकड़ लिया था।

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