Delhi News: अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के बेहद करीबी सलीम डोला को तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में गिरफ्तार कर भारत भेज दिया गया है। भारतीय खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय पुलिस के सफल तालमेल से यह बड़ी कामयाबी मिली है। अधिकारियों के मुताबिक, डोला को मंगलवार सुबह एक विशेष विमान से दिल्ली लाया गया। दिल्ली के टेक्निकल एयरपोर्ट पर उतरते ही उसे हिरासत में ले लिया गया। फिलहाल खुफिया एजेंसियां उससे अंडरवर्ल्ड नेटवर्क के गहरे राज उगलवाने के लिए कड़ी पूछताछ कर रही हैं।
मुंबई पुलिस को सौंपने की तैयारी
दिल्ली में शुरुआती पूछताछ पूरी होने के बाद सलीम डोला को आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए मुंबई पुलिस के हवाले किया जाएगा। डोला के दाऊद इब्राहिम के आपराधिक सिंडिकेट से पुराने और गहरे संबंध रहे हैं। भारतीय जांच एजेंसियों का मानना है कि डोला की गिरफ्तारी से संगठित अपराध गिरोहों के खिलाफ चल रही जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। उसके पास डी-कंपनी की वर्तमान गतिविधियों और फंडिंग से जुड़ी कई अहम जानकारियां मौजूद हैं।
भारत और तुर्की के बीच प्रत्यर्पण संधि
सलीम डोला की वापसी भारत और तुर्की के बीच साल 2001 में हुई प्रत्यर्पण संधि के कारण संभव हो पाई है। इस औपचारिक कानूनी ढांचे का उद्देश्य आतंकवाद और सीमा पार अपराधों से मिलकर निपटना है। जून 2002 में यह समझौता पूरी तरह लागू हुआ था। तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी और तुर्की के न्याय मंत्री हिकमत सामी तुर्क ने इस पर हस्ताक्षर किए थे। यह संधि सुनिश्चित करती है कि अपराधी एक देश से दूसरे देश भागकर न्याय से बच न सकें।
न्यायिक सहयोग और अपराधियों पर लगाम
इस महत्वपूर्ण संधि के तहत दोनों देश उन आरोपियों को प्रत्यर्पित करने पर सहमत हुए थे, जिन्हें कम से कम एक साल की सजा वाले अपराधों का दोषी माना गया है। इसके अलावा, दिसंबर 2012 में दोनों देशों के बीच कैदियों के हस्तांतरण को लेकर एक और महत्वपूर्ण समझौता हुआ था। इसके तहत विदेशी जेलों में बंद कैदियों को अपने गृह देश में सजा काटने की अनुमति मिल सकती है। डोला का डिपोर्टेशन इन्हीं मजबूत कूटनीतिक और न्यायिक संबंधों का प्रत्यक्ष परिणाम है।
नाइजीरिया में इस्लामिक स्टेट का खूनी खेल
दुनिया के दूसरे हिस्से नाइजीरिया में इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने भीषण तबाही मचाई है। गुयाकू गांव पर हुए ताजा हमले में आतंकियों ने 29 बेगुनाह ग्रामीणों की बेरहमी से हत्या कर दी। इस हमले ने क्षेत्र में बढ़ती आतंकी गतिविधियों और नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस क्रूरता की कड़ी निंदा की है। नाइजीरियाई सेना अब इन आतंकियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चला रही है।
डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश का खुलासा
अमेरिका से जुड़ी एक और बड़ी खबर में व्हाइट हाउस में घुसने की कोशिश करने वाले एक संदिग्ध को लेकर खुलासा हुआ है। आरोपी पर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश रचने का संदेह है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, पकड़े गए व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा मिल सकती है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की गहन जांच कर रही हैं कि इस साजिश के पीछे किसी बड़े नेटवर्क का हाथ तो नहीं था। व्हाइट हाउस की सुरक्षा अब और अधिक सख्त कर दी गई है।


