खरगे के ‘विवादास्पद’ बयान पर चुनाव आयोग पहुंची भाजपा, क्या प्रचार पर लगेगी रोक?

Election Commission: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के आखिरी दौर में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर की गई टिप्पणी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया है। भाजपा ने खरगे के बयान को आदर्श चुनाव आचार संहिता (MCC) का सीधा उल्लंघन बताया है। पार्टी ने आयोग से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है।

भाजपा ने निर्वाचन आयोग को लिखा कड़ा पत्र

भाजपा ने चुनाव आयोग को लिखे पत्र में कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि इस तरह की भाषा चुनावी माहौल को खराब करती है। भाजपा ने अपनी शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं का उल्लेख किया है। इनमें मुख्य रूप से धारा 175, 171/174 और 356(1) के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। पार्टी का कहना है कि यह प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत छवि को ठेस पहुंचाने की कोशिश है।

प्रचार पर पाबंदी और माफी की मांग

सत्ताधारी दल ने आयोग से मांग की है कि मल्लिकार्जुन खरगे को उनके बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। भाजपा ने यह भी सुझाव दिया है कि अगर जरूरत पड़े, तो खरगे के चुनाव प्रचार पर पाबंदी लगाई जाए। इसके अलावा, पार्टी चाहती है कि सोशल मीडिया और अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस विवादास्पद बयान के प्रसार को रोका जाए। भाजपा के अनुसार, ऐसे बयान मतदाताओं को गुमराह करने और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने के उद्देश्य से दिए जाते हैं।

क्या था मल्लिकार्जुन खरगे का पूरा बयान?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब खरगे तमिलनाडु में प्रचार के दौरान पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने सामाजिक न्याय और पेरियार, अंबेडकर तथा अन्नादुरई के आदर्शों का जिक्र किया। इसी दौरान उन्होंने एआईएडीएमके के भाजपा के साथ गठबंधन पर सवाल उठाए। खरगे ने कहा कि अन्नादुरई की तस्वीर लगाने वाले लोग प्रधानमंत्री जैसे व्यक्ति के साथ कैसे जा सकते हैं। उनके बयान में ‘आतंकवादी’ शब्द के उपयोग ने सियासी गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी, जिसे भाजपा ने चुनावी मुद्दा बना लिया है।

विवाद के बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने दी सफाई

बयान पर मचे बवाल को देखते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने बाद में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया है। खरगे के अनुसार, उनके कहने का तात्पर्य यह था कि प्रधानमंत्री केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए विपक्ष को डराते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार ईडी, सीबीआई और आईटी जैसी संस्थाओं का उपयोग राजनीतिक हथियार के रूप में कर रही है। हालांकि, भाजपा उनकी इस सफाई से संतुष्ट नहीं है और कानूनी कार्रवाई पर अड़ी हुई है।

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