स्मार्टफोन महंगे हुए तो मची लूट! रिफर्बिश्ड फोन के दीवाने हुए भारतीय, Apple और Samsung की है सबसे ज्यादा डिमांड

New Delhi News: क्या आप नया स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं और बजट कम पड़ रहा है? तो आप अकेले नहीं हैं। भारत में इस वक्त रिफर्बिश्ड यानी सर्टिफाइड प्री-ओन्ड स्मार्टफोन्स की मांग में भारी उछाल देखा जा रहा है। स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों के बीच लोग नए फोन के बजाय सेकंड-हैंड डिवाइस को तरजीह दे रहे हैं।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में रिफर्बिश्ड स्मार्टफोन बाजार में जबरदस्त डिमांड रही है और 2026 में यह ग्राफ और ऊपर जाने की उम्मीद है। चिपसेट और जरूरी कंपोनेंट महंगे होने के कारण बजट स्मार्टफोन भी अब आम आदमी की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं, जो इस बदलाव की मुख्य वजह है।

iPhone की लोकप्रियता में भारी इजाफा

बाजार में सबसे ज्यादा क्रेज iPhone का है। भारत में Apple की बाजार हिस्सेदारी जो 2019 में महज 2 फीसदी थी, वह अब 9 फीसदी तक पहुंच गई है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से उपलब्ध रिफर्बिश्ड iPhone ने प्रीमियम स्मार्टफोन के शौकीनों के लिए इन डिवाइसों तक पहुंच को बेहद सुलभ और किफायती बना दिया है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यूजर्स नए फोनों की तुलना में 40 से 60 फीसदी कम कीमत पर प्रीमियम अनुभव पा रहे हैं। कैशिफाई के सीएमओ नकुल कुमार के अनुसार, युवा ग्राहक और टेक प्रेमी अब नए मिड-रेंज फोन के बजाय पुराने फ्लैगशिप डिवाइस चुन रहे हैं, क्योंकि इनमें फीचर्स और परफॉर्मेंस बेहतर मिलती है।

क्यों बदल रहा है ग्राहकों का व्यवहार?

रिफर्बिश्ड मार्केट के बढ़ने के पीछे व्यवस्थित प्लेटफॉर्म्स का बड़ा योगदान है। पहले जहां लोकल मार्केट में धोखे का डर था, वहीं अब ऑनलाइन री-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स 6 से 12 महीने की वारंटी, पारदर्शी कीमत और प्रॉपर ग्रेडिंग दे रहे हैं। इससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है और वे बिना किसी डर के खरीदारी कर पा रहे हैं।

स्मार्टफोन अब केवल जरूरत नहीं, बल्कि सोशल स्टेटस का हिस्सा भी बन गए हैं। भारत का मिडिल क्लास और जेन-जी वर्ग Samsung Galaxy S-सीरीज या iPhone जैसे प्रीमियम फोन चाहता है। रिफर्बिश्ड चैनल इस एस्पिरेशनल गैप को भर रहे हैं। लोग बिना कर्ज लिए, आधी कीमत पर शानदार फीचर्स और बेहतरीन कैमरा क्वालिटी का लाभ उठा रहे हैं।

डिवाइस की लंबी उम्र भी बड़ी वजह

आजकल के टॉप-टियर स्मार्टफोन्स इस तरह डिजाइन किए जा रहे हैं कि वे 4 से 5 साल तक आसानी से काम कर सकें। शहरी भारतीय ग्राहक अक्सर 18 से 24 महीने के भीतर अपना फोन बदल देते हैं। ऐसे में सेकेंडरी मार्केट में ऐसे धाकड़ डिवाइस आते हैं जो दूसरे मालिक के लिए बिल्कुल नए जैसे होते हैं।

यह ट्रेंड स्पष्ट करता है कि भारतीय उपभोक्ता अब समझदार हो गए हैं। वे ‘नया’ खरीदने के बजाय ‘बेहतर’ अनुभव को चुन रहे हैं। अगर आप भी नया फोन लेने का मन बना रहे हैं, तो रिफर्बिश्ड मार्केट का विकल्प आपके बजट और जरूरत दोनों को पूरा कर सकता है। बस भरोसेमंद प्लेटफॉर्म का चुनाव करना बहुत जरूरी है।

Author: Mohit

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