Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में कुदरत के कहर को रोकने के लिए प्रशासन अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है। उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में करीब 20.70 करोड़ रुपये के चार बड़े प्रोजेक्ट्स पर मुहर लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। इन प्रस्तावों का सीधा मकसद शिमला के उन जख्मों को भरना है, जो हर साल भारी बारिश, भूस्खलन और धंसती सड़कों के रूप में सामने आते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब फाइलों में देरी बर्दाश्त नहीं होगी और एक सप्ताह के भीतर सभी तकनीकी कमियों को दूर कर इन्हें राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजा जाएगा।
इन चार इलाकों की बदलेगी तस्वीर: करोड़ों का मास्टर प्लान
बैठक में चार खास इलाकों पर फोकस किया गया है। सबसे पहले सुरु गांव के लिए 1.86 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। यहाँ जल निकासी की बेहतर व्यवस्था बनाकर बाढ़ और मिट्टी के कटाव को रोका जाएगा। दूसरा बड़ा हिस्सा रामचंद्र चौक से हेनॉल्ट पब्लिक स्कूल के बीच का है। इस 9.33 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट से धंसती जमीन को स्थिर किया जाएगा, ताकि राहगीरों और गाड़ियों पर मंडराता खतरा टल सके।
सड़कों की मजबूती और स्कूलों की सुरक्षा पर जोर
शिमला-मंडी मार्ग, जो इस इलाके की लाइफलाइन है, उसे सुरक्षित करने के लिए 9.05 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सुन्नी क्षेत्र में अक्सर होने वाले लैंडस्लाइड को रोकने के लिए यहाँ आधुनिक तकनीकी उपाय किए जाएंगे। इसके अलावा, प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है। कुफरी के सीनियर सेकेंडरी स्कूल के भवन को भूकंप से बचाने के लिए 43.94 लाख रुपये से रेट्रोफिटिंग की जाएगी। उपायुक्त ने निर्देश दिए हैं कि पहले से लंबित प्रस्तावों को भी जल्द सुधार कर दोबारा भेजा जाए ताकि आपदा पूर्व तैयारी में कोई कमी न रहे।


