Chandigarh News: चंडीगढ़ के वन विभाग में तैनात एक घूसखोर बाबू को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है। जूनियर असिस्टेंट अमृतपाल सिंह को 10 साल पुराने रिश्वत कांड में दोषी करार दिया गया है। अदालत ने इस भ्रष्ट कर्मचारी को चार साल की कड़ी कैद की सजा दी है। इसके साथ ही 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। विजिलेंस ने 2015 में इसे रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था।
अमृतपाल सिंह वन संरक्षक कार्यालय में बतौर जूनियर असिस्टेंट तैनात था। उसने खुड़ा अलीशेर के एक लकड़ी व्यापारी कल्याण सिंह से भारी रिश्वत की मांग की थी। आरोपी ने पेड़ काटने के मामले में झूठी कार्रवाई का डर दिखाया। उसने व्यापारी से 70 से 80 हजार रुपये की मांग की थी। बाद में उसने 10 हजार रुपये की रिश्वत एडवांस के तौर पर ले भी ली थी।
व्यापारी को दी 7 साल जेल की धमकी
कल्याण सिंह ने 28 जून 2015 को विजिलेंस विभाग को एक अहम शिकायत दी थी। उन्होंने बताया था कि वे खुड़ा अलीशेर गांव में कई वर्षों से लकड़ी का व्यापार करते हैं। उन्होंने अपने घर के पास एक प्लॉट की मालकिन पुनीत शर्मा से कुछ पेड़ खरीदे थे। इन पेड़ों का सौदा 85 हजार रुपये में तय हुआ था। तभी आरोपी बाबू अपनी काली कार में व्यापारी के पास पहुंचा।
आरोपी ने खुद को वन विभाग का एक बड़ा कर्मचारी बताया। उसने बिना अनुमति पेड़ काटने के आरोप में केस दर्ज करवाने की सीधी धमकी दी। आरोपी ने व्यापारी को डराया कि इस मामले में सात साल की जेल हो सकती है। जेल से बचने के लिए उसने एक लाख रुपये की भारी रकम मांगी। बाद में 70-80 हजार रुपये में पूरा सौदा तय किया गया।
ऑडियो रिकॉर्डिंग ने खोला घूसखोरी का राज
आरोपी बाबू ने उसी दिन दोपहर को फोन करके फिर से पैसों की मांग की। शाम करीब छह बजे वह दोबारा व्यापारी की दुकान पर पहुंच गया। शिकायतकर्ता ने डरकर उसे पांच हजार रुपये नकद दे दिए। आरोपी ने बाकी बचे हुए पैसे अगले दिन लेने की बात कही। लेकिन चालाक व्यापारी ने इस पूरी बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग कर ली थी।
व्यापारी ने बाकी पैसे देने से साफ इनकार कर दिया। वह सबूत लेकर सीधा विजिलेंस कार्यालय पहुंच गया और शिकायत दर्ज कराई। विजिलेंस ने सबूतों के आधार पर 29 जून को एफआईआर दर्ज की और अपना जाल बिछाया। जांच में आरोप सही पाए जाने पर आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। अब पूरे 10 साल बाद जिला अदालत ने इस मामले में अपना सख्त फैसला सुनाया है।


