Chandigarh News: चंडीगढ़ में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले की जांच अब काफी तेज हो गई है। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के 116.84 करोड़ रुपये के गबन ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस बड़े महाघोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए पुलिस ने आठ सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया है। एसआईटी अब नगर निगम के बैंक खातों की पूरी कुंडली खंगालेगी।
यह पूरा घोटाला सरकारी विभागों के खातों से करोड़ों रुपये डायवर्ट करने से सीधा जुड़ा है। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली थी। शुरुआती जांच में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की फिक्स्ड डिपॉजिट में भारी वित्तीय हेराफेरी सामने आई है। घोटाले की इस बड़ी रकम को शातिर तरीके से रियल एस्टेट और अन्य जगहों पर निवेश किया गया है।
आमने-सामने होगी पूछताछ, खुलेंगे कई गहरे राज
इस बीच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम भी पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। गिरफ्तार किए गए बैंक मैनेजर और अन्य आरोपितों को जल्द प्रोडक्शन वारंट पर लाया जाएगा। इसके बाद इन सभी आरोपितों का आमना-सामना रियल एस्टेट इन्वेस्टर विक्रम वधवा से करवाया जाएगा। विक्रम वधवा फिलहाल इस मामले में पुलिस की सख्त रिमांड पर चल रहे हैं।
एसआईटी अब बैंक के एक-एक लेनदेन की बहुत बारीकी से जांच करेगी। हर आरोपित की भूमिका तय होगी और गबन किए गए पैसे का अंतिम सुराग खोजा जाएगा। पुलिस सूत्रों की मानें तो इस घोटाले की आंच कई रसूखदार और बड़े अधिकारियों तक पहुंच सकती है। जांच एजेंसी का दावा है कि आने वाले दिनों में इस केस में और भी चौंकाने वाले बड़े खुलासे होंगे।


