Himachal News: क्या आप भी हल्की खांसी या बुखार होने पर सीधे केमिस्ट से दवा ले लेते हैं? अब आपको बहुत सावधान होने की जरूरत है। देश में बिना मंजूरी वाली 90 दवाएं धड़ल्ले से बाजार में बिक रही हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने इसका एक बहुत बड़ा खुलासा किया है। इन खतरनाक दवाओं की सूची में हिमाचल प्रदेश की 19 फार्मा कंपनियों का नाम भी शामिल है। यह सीधे तौर पर आम आदमी की जिंदगी और सेहत से जुड़ा गंभीर मामला है।
हिमाचल की 26 दवाओं पर लटकी तलवार
हिमाचल प्रदेश देश का सबसे बड़ा फार्मा हब माना जाता है। लेकिन अब यहां की 19 कंपनियों की 26 दवाओं पर गहरे सवाल उठ गए हैं। बद्दी, नालागढ़, कांगड़ा और पांवटा साहिब की कई कंपनियां जांच के घेरे में आ गई हैं। बद्दी स्थित एक ही कंपनी के पांच सैंपल बिना मंजूरी वाले पाए गए हैं। अन्य जगहों की कंपनियों के भी दो-दो सैंपल बिना लाइसेंस वाले मिले हैं।
किन बीमारियों की दवाएं हैं शामिल?
सीडीएससीओ द्वारा पकड़ी गई इन 90 दवाओं में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले कई नाम शामिल हैं। इनमें पैरासिटामोल, मल्टीविटामिन और खांसी-जुकाम की आम सिरप शामिल हैं। दर्द, मधुमेह, नसों के दर्द और गैस की दवाएं भी इस सूची में पाई गई हैं। बिना सही जांच और मंजूरी के ऐसी दवाएं खाना सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
कैसे हुआ इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा?
भारत के औषधि महानियंत्रक डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने इस मामले में सख्त निर्देश जारी किए हैं। सुगम पोर्टल पर साल 2025 के प्रयोगशाला परीक्षण डेटा की बारीकी से जांच की गई। इस जांच में बड़ी संख्या में ऐसी दवाएं मिलीं जिन्हें ‘नई दवा’ की श्रेणी में रखा गया है। नियमों के मुताबिक इन दवाओं के लिए केंद्र सरकार से कोई भी अनुमति नहीं ली गई थी।
क्या होती हैं एफडीसी (FDC) दवाएं?
एफडीसी का मतलब ‘फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन’ होता है। इस प्रक्रिया में दो या अधिक सक्रिय दवाओं को एक ही टैबलेट या सिरप में मिलाया जाता है। इसके लिए ठोस वैज्ञानिक प्रमाण और सुरक्षा डेटा होना बहुत जरूरी होता है। बिना प्रामाणिक जांच के इन्हें खाने से शरीर पर गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। मरीजों की जान को सीधा खतरा पैदा हो सकता है।
दवा कंपनियों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश दे दिए हैं। बिना मंजूरी वाली दवाओं के निर्माण और बिक्री पर तुरंत रोक लगाई जाएगी। राज्य दवा नियंत्रक डॉ. मनीष कपूर ने इस दिशा में सख्त कदम उठाए हैं। उन्होंने सभी संबंधित कंपनियों से जरूरी अनुमतियों के दस्तावेज तलब कर लिए हैं। लाइसेंसिंग अधिकारियों को भी नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए गए हैं।


