कमाई बंपर पर महीने के अंत में जेब खाली, जानिए सोशल मीडिया की चकाचौंध में क्यों बर्बाद हो रहे युवा

Prayagraj News: सिविल लाइंस के आलीशान कैफे हों या संगम किनारे वीकेंड आउटिंग, देश की युवा पीढ़ी आज पहले से कहीं ज्यादा पैसे लुटा रही है। फ्रीलांसिंग और ऑनलाइन नौकरियों से बंपर कमाई के बावजूद युवाओं की जेब महीने के आखिरी दिनों में पूरी तरह खाली हो रही है।

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महीने की शुरुआत में बैंक खाते में मोटी सैलरी आते ही ऑनलाइन शॉपिंग और घूमने-फिरने के महंगे प्लान तैयार हो जाते हैं। इसके तुरंत बाद महीने के अंत तक आते-आते यही युवा गंभीर आर्थिक संकट और बचत की गहरी चिंता में पूरी तरह डूब जाते हैं।

ईएमआई और दिखावे के चक्कर में खत्म हो रही सेविंग्स

पहले जहां नौकरी लगते ही भविष्य के लिए निवेश पर ध्यान दिया जाता था, वहीं आज कमाई का बड़ा हिस्सा ऐशोआराम पर खर्च हो रहा है। शहर के युवाओं में बढ़ता कैफे कल्चर, ऑनलाइन फूड ऑर्डर और ब्रांडेड फैशन उनकी जमा पूंजी को तेजी से खत्म कर रहा है।

महंगे मोबाइल फोन, गैजेट्स और बाइक अब आसान मासिक किस्तों पर मिलने लगे हैं। इस ईएमआई कल्चर ने खरीदारी को जरूर आसान बनाया है, लेकिन हर महीने युवाओं पर कर्ज का बोझ भी काफी बढ़ा दिया है। युवा अपनी आय का बड़ा हिस्सा इसी में गंवा रहे हैं।

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मानसिक बीमारी का रूप ले रही है ये फाइनेंशियल एंग्जायटी

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बार-बार बैंक बैलेंस चेक करना, भविष्य को लेकर डरना और खर्चों के कारण लगातार तनाव में रहना फाइनेंशियल एंग्जायटी के मुख्य लक्षण हैं। सोशल मीडिया पर दूसरों की नकली लग्जरी लाइफस्टाइल से खुद की तुलना करना युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य बिगाड़ रहा है।

साइकोलॉजिस्ट अतुल कुमार सिंह बताते हैं कि जब कोई व्यक्ति अपनी असली क्षमता से ज्यादा खर्च करने लगता है, तो मानसिक तनाव बढ़ना तय है। वहीं बैंक कर्मचारी वर्निका के अनुसार बिना प्लानिंग के डिजिटल पेमेंट और क्रेडिट कार्ड का अंधाधुंध इस्तेमाल सेविंग्स को खत्म कर देता है।

आर्थिक सुरक्षा के लिए अपनाएं यह खास 50-30-20 का नियम

प्रसिद्ध फाइनेंशियल एडवाइजर ज्योति चंद्रा कहती हैं कि हर महीने युवाओं को अपनी कुल कमाई का कम से कम 20% हिस्सा भविष्य के लिए जरूर बचाना चाहिए। युवाओं को अपनी सैलरी का 50% जरूरतों पर, 30% इच्छाओं पर और 20% बचत में निवेश करना चाहिए।

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बंद करके दैनिक जीवन में केवल डेबिट कार्ड या यूपीआई का ही प्रयोग करें। किसी भी संकट से निपटने के लिए अपने पास 6 महीने की सैलरी के बराबर का एक मजबूत इमरजेंसी फंड अलग बैंक खाते में सुरक्षित रखें।

Author: Karuna Sen

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