Himachal News: हिमाचल प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी और भारी-भरकम फीस से परेशान अभिभावकों के लिए एक बड़ी खबर है। राज्य सरकार जल्द ही प्राइवेट स्कूलों की फीस तय करने के लिए एक नया सख्त कानून लाने जा रही है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विधानसभा में स्पष्ट किया है कि फीस को नियंत्रित करने के लिए मौजूदा कानून में अहम संशोधन किए जाएंगे।
यूपी और कर्नाटक की तर्ज पर बदलेगा कानून
अभी तक हिमाचल के मौजूदा कानून में निजी स्कूलों की फीस तय करने का कोई ठोस नियम नहीं है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने अपने कानून बदले हैं। इन्हीं राज्यों की तर्ज पर हिमाचल सरकार भी प्राइवेट स्कूलों का नया फीस स्ट्रक्चर तैयार करेगी। विधायक राम कुमार ने विधानसभा के प्रश्नकाल में शिक्षा के इस बढ़ते व्यापार पर एक गंभीर सवाल उठाया था। उन्होंने पूछा था कि वार्षिक शुल्क के नाम पर जो दोबारा एडमिशन फीस ली जा रही है, उसे रोकने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठा रही है।
गरीब बच्चों के दाखिले और कॉलेजों पर सरकार का फोकस
शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें गरीबी रेखा से नीचे (BPL) आने वाले बच्चों के लिए आरक्षित हैं। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने सदन में स्वीकार किया कि यह अहम नियम राज्य में पूरी तरह से लागू नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा विधायक हरदीप बाबा के एक सवाल पर उन्होंने कॉलेजों के बुनियादी ढांचे पर भी बात की। सरकार का पहला फोकस उन कॉलेजों पर है, जहां छात्रों की संख्या ज्यादा है और सभी विषय पढ़ाए जाते हैं। जिन कॉलेजों का 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है, उनके लिए मुख्यमंत्री ने बजट में 500 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है।

