West Bengal News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतगणना जारी है और रुझानों ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ऐतिहासिक बढ़त के साथ राज्य में पहली बार सरकार बनाती नजर आ रही है। बंगाल की 294 सीटों में से 293 पर दो चरणों में मतदान हुआ था। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC), जो पिछले 15 वर्षों से सत्ता में थी, इस बार बीजेपी की रणनीति के सामने पिछड़ती दिख रही है।
समान नागरिक संहिता और सीएए का दांव
बीजेपी के शानदार प्रदर्शन के पीछे समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का बड़ा वादा माना जा रहा है। पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में घोषणा की थी कि पहली कैबिनेट बैठक में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। इस वादे ने मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को प्रभावित किया और पार्टी को इसका सीधा फायदा मिला। ममता बनर्जी इस बार बीजेपी के इस वैचारिक ध्रुवीकरण और कानूनी वादे की ठोस काट नहीं खोज सकीं।
महिलाओं के लिए मुफ्त शिक्षा और आरक्षण
बंगाल में बीजेपी की बढ़त के पीछे महिलाओं के लिए की गई कल्याणकारी घोषणाएं भी निर्णायक साबित हुई हैं। बीजेपी ने लड़कियों के लिए केजी से पीजी तक की शिक्षा मुफ्त करने का संकल्प लिया था। साथ ही सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा भी किया गया। सबसे आकर्षक घोषणा हर महिला के बैंक खाते में मासिक 3,000 रुपये जमा करने की थी, जिसने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिला वोटरों को लुभाया है।
घुसपैठ पर जीरो टॉलरेंस की सख्त नीति
राज्य में लंबे समय से चली आ रही घुसपैठ की समस्या को बीजेपी ने चुनाव में प्रमुख मुद्दा बनाया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी रैलियों में बार-बार घुसपैठ को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी सरकार घुसपैठियों को बाहर निकालकर बंगाल और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। सुरक्षा और जनसांख्यिकीय बदलाव की चिंता करने वाले मतदाताओं ने बीजेपी के इस कड़े रुख का पुरजोर समर्थन किया है।
राजनीतिक हिंसा की जांच के लिए एसआईटी
बीजेपी ने चुनावी हिंसा के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए एसआईटी (SIT) गठन करने का आश्वासन दिया था। पार्टी ने वादा किया कि सत्ता में आने पर सभी राजनीतिक हिंसाओं की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी। इसके अलावा हिंसा के पीड़ितों के लिए विशेष मुआवजा योजना शुरू करने की बात भी कही गई थी। इस कदम ने उन लोगों का भरोसा जीता जो राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति से लंबे समय से असंतुष्ट थे।
सातवां वेतन आयोग और केंद्रीय योजनाएं
सरकारी कर्मचारियों और आम जनता को लुभाने के लिए बीजेपी ने सत्ता संभालने के 45 दिनों के भीतर 7वां वेतन आयोग लागू करने का वादा किया। इसके साथ ही आयुष्मान भारत जैसी सभी रुकी हुई केंद्रीय योजनाओं को बंगाल में तुरंत शुरू करने का संकल्प भी पार्टी के पक्ष में गया। टीएमसी इन आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों के जवाब में कोई नया नैरेटिव सेट नहीं कर पाई। परिणामस्वरूप, पश्चिम बंगाल में अब सत्ता परिवर्तन की आहट साफ सुनाई दे रही है।

