यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पूर्वांचल में बदले राजनीतिक समीकरण, जानिए क्यों सत्ता की चाबी माना जाता है यह क्षेत्र

Lucknow News: उत्तर प्रदेश की सियासत में पूर्वांचल क्षेत्र को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। लगभग एक सौ साठ विधानसभा सीटों वाला यह विशाल इलाका लंबे समय से राज्य में सरकार बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखता है। गंगा, गोमती, राप्ती और गंडक जैसी प्रमुख नदियों से समृद्ध यह क्षेत्र कृषि और घनी आबादी के लिहाज से बेहद खास है।

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यूपी चुनाव 2027 में क्यों बदल गए पुराने राजनीतिक समीकरण

पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कई छोटे क्षेत्रीय दलों के साथ मजबूत गठबंधन किया था। इसका सीधा फायदा पार्टी को पूर्वांचल की कई महत्वपूर्ण सीटों पर मिला था। मगर अब बदले हुए राजनीतिक माहौल में जमीनी हालात पहले जैसे नहीं रहे। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल जैसे दल अब एनडीए गठबंधन का हिस्सा बन चुके हैं।

विपक्षी खेमे में पुराने सहयोगियों के बीच पहले जैसी वैचारिक मजबूती नहीं दिख रही है। कांग्रेस के साथ लोकसभा चुनाव में हुआ तालमेल भले ही सफल रहा हो, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा बड़ी चुनौती बनेगा। राजनैतिक विश्लेषकों के अनुसार विपक्ष के लिए पुराना प्रदर्शन दोहराना इस बार बिल्कुल आसान नहीं होने वाला है।

पूर्वांचल की राजनीति में जाति के साथ विकास बना बड़ा मुद्दा

इस क्षेत्र की राजनीति अब सिर्फ पुराने जातीय समीकरणों तक ही सीमित नहीं रह गई है। चमचमाती सड़कें, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, रेलवे नेटवर्क का आधुनिकीकरण और कानून-व्यवस्था जैसे विकासवादी मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में आ चुके हैं। सत्तारूढ़ भाजपा ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और औद्योगिक परियोजनाओं को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया है।

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इसके साथ ही युवाओं के बीच रोजगार, बेहतर शिक्षा और आधुनिक डिजिटल सुविधाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि पारंपरिक जातीय राजनीति पूरी तरह खत्म हो गई है। बल्कि अब आम मतदाता विकास कार्यों और स्थानीय नागरिक सुविधाओं को भी अपने वोट का मुख्य आधार बना रहे हैं।

पूर्वांचल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि गोरखपुर का मुख्य इलाका है। इसलिए सत्तारूढ़ भाजपा के लिए इस क्षेत्र को जीतना बेहद जरूरी है। दूसरी ओर प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के सामने महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर जनता का भरोसा जीतने की बड़ी चुनौती है।

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