Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में अघोषित बिजली कटौती को लेकर शुरू हुआ विवाद अब काफी ज्यादा गहरा गया है। बिजली कटौती पर जूनियर इंजीनियर (JE) को बंधक बनाने से शुरू हुआ यह प्रकरण अब यूपी के कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार और ऊर्जा निगम के चीफ इंजीनियर के बीच तीखी तल्खी तक पहुंच चुका है।
कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने विकास भवन के सभागार में मंगलवार को जिला स्तरीय अधिकारियों की एक बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई थी। इस बैठक के दौरान बिजली संकट पर बात करते हुए मंत्री ने चीफ इंजीनियर विनोद कुमार गुप्ता से कड़े लहजे में कहा कि अगर नेता बनना है, तो तुरंत अपने पद से इस्तीफा दो और सामने आओ।
मंत्री की इस बेहद तल्ख टिप्पणी से नाराज होकर चीफ इंजीनियर बीच बैठक से उठकर बाहर जाने लगे। लेकिन वहां मौजूद मुख्य विकास अधिकारी (CDO) ने उन्हें बीच में ही रोक लिया। इसके बाद जिले के जिलाधिकारी (DM) ने खुद बैठक में पहुंचकर स्थिति को संभाला और बीच-बचाव किया।
विकास भवन के सभागार में शाम ठीक चार बजे शुरू हुई इस बैठक में बिजली विभाग और लोक निर्माण विभाग (PWD) के उच्चाधिकारियों को विशेष रूप से बुलाया गया था। बैठक की शुरुआत होते ही उपभोक्ताओं के खिलाफ दर्ज हुई पुलिस रिपोर्ट के मामले ने बहुत तेजी से तूल पकड़ लिया।
कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने चीफ इंजीनियर की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि उपभोक्ताओं और जनप्रतिधियों के साथ अधिकारियों का व्यवहार हमेशा संवैधानिक और मर्यादित होना चाहिए। उन्होंने चीफ इंजीनियर द्वारा मीडिया में दिए गए बयानों की भाषा पर भी गंभीर सवाल उठाए।
रालोद कार्यकर्ताओं की व्यक्तिगत टिप्पणी पर भड़के चीफ इंजीनियर
चीफ इंजीनियर विनोद कुमार गुप्ता ने बैठक में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि जिले के बिजलीघरों का विद्युत भार बढ़ाने के लिए शासन को बकायदा प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन क्षेत्र में अत्यधिक लाइन लॉस होने के कारण तकनीकी आधार पर उस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया है।
इसी चर्चा के दौरान बैठक में मौजूद राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के कार्यकर्ताओं ने चीफ इंजीनियर पर कुछ व्यक्तिगत टिप्पणियां कर दीं। इस बात से आहत होकर चीफ इंजीनियर तुरंत सभागार से बाहर जाने लगे, जिसके बाद सीडीओ कंडारकर कमल किशोर देशभूषण ने सबको अनुशासन में रहने की हिदायत दी।
हंगामे के बीच जिले के डीएम उमेश मिश्रा बैठक में पहुंचे। उनके सामने भी रालोद कार्यकर्ताओं ने चीफ इंजीनियर की कार्यशैली पर जमकर सवाल उठाए और हंगामा किया। हालांकि, कैबिनेट मंत्री और स्थानीय सांसद चंदन चौहान ने सभी कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील की।
बिजली कटौती के साथ सड़कों की खराब गुणवत्ता पर भी जताई नाराजगी
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में बिजली कटौती के अलावा पीडब्ल्यूडी विभाग की सड़कों की खराब गुणवत्ता को लेकर भी सांसद और मंत्री ने गहरी नाराजगी जताई। मंत्री ने डीएम को निर्देश दिया कि हंसावाला मार्ग पर बिना विद्युत खंभे हटाए ही सड़क का निर्माण करा दिया गया है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
दरअसल, पिछले रविवार को बिजली कटौती से गुस्साए लोगों ने गांधी वाटिका बिजलीघर पर जमकर हंगामा किया था। इसके बाद बिजलीघर के जेई ने लाइनमैन को बंधक बनाने का आरोप लगाते हुए नई मंडी थाने में तहरीर दी थी, जिस पर मंत्री ने मुकदमा दर्ज न कराने की सिफारिश की थी।
चीफ इंजीनियर ने मुकदमा रोकने से मना कर दिया था, जिससे फोन पर ही दोनों के बीच तीखी बहस हो गई थी। इसके बाद रालोद कार्यकर्ताओं ने सोमवार को चीफ इंजीनियर के दफ्तर की बिजली काट दी थी। हालांकि, बैठक के बाद बंद कमरे में डीएम, मंत्री और चीफ इंजीनियर के बीच समझौता वार्ता हुई।

