ज्ञानवापी विवाद में नया मोड़: मध्यस्थता के लिए तैयार हुआ मुस्लिम पक्ष, आज वाराणसी कोर्ट में अहम बैठक

Varanasi News: वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी मस्जिद मामले को सुलह-समझौते से सुलझाने की दिशा में एक बड़ी प्रगति हुई है। पूर्व में इनकार करने के बाद, अब मुस्लिम पक्ष (अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद) सुप्रीम कोर्ट की पहल पर होने वाली मध्यस्थता प्रक्रिया की बैठक में शामिल होने के लिए राजी हो गया है।

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अंजुमन के पदाधिकारियों और वकीलों के बीच सोमवार शाम को हुई मैराथन चर्चा के बाद यह सहमति बनी। समिति के अधिवक्ता मोहम्मद रईस और मोहम्मद मुमताज मंगलवार सुबह होने वाली इस महत्वपूर्ण वार्ता में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद की ओर से अपना पक्ष रखने के लिए कोर्ट पहुंचेंगे।

एडीजे की अगुवाई में तीन सदस्यीय समिति करेगी सुनवाई

उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर जिला जज ने ज्ञानवापी से जुड़े मुकदमों को आपसी सुलह के लिए मध्यस्थता केंद्र भेजा था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी फाइलें एडीजे-षष्ठम् आलोक कुमार की अदालत में ट्रांसफर की गई हैं। यहां उनकी अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय विशेष समिति पक्षकारों से बात करेगी।

इस बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राजीव मुकुल पांडेय भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। मध्यस्थता केंद्र की ओर से सभी संबंधित पक्षों को 14 जुलाई (मंगलवार) को वार्ता में भाग लेने के लिए पहले ही आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया गया था।

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श्रृंगार गौरी समेत चार प्रमुख मुकदमों पर होगी चर्चा

हिंदू पक्ष के अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी के अनुसार, इस वार्ता के दौरान ज्ञानवापी से जुड़े चार मुख्य मुकदमों पर आम सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसमें श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की मांग और परिसर के सभी बंद तहखानों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण से जुड़े अहम केस शामिल हैं।

इसके अलावा, शैलेंद्र पाठक व्यास का वाद और जमीन की अदला-बदली से जुड़ी फाइलें भी समिति के समक्ष रखी जाएंगी। दूसरी तरफ, श्रृंगार गौरी केस की मुख्य वादिनी राखी सिंह और 1991 के मूलवाद के वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने इस मध्यस्थता प्रक्रिया से खुद को दूर रखा है। उनका मानना है कि इस संवेदनशील मसले का अंतिम हल केवल अदालत के फैसले से ही संभव है।

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