Varanasi News: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने ‘कुलपति वित्तीय सहायता योजना’ को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसकी विशेष संचालन समिति का नए सिरे से पुनर्गठन कर दिया है।
यह महत्वपूर्ण योजना मुख्य रूप से उन गरीब विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में मदद देने के लिए चलाई जा रही है, जिनके परिवारों के पास अंत्योदय अन्न योजना का राशन कार्ड उपलब्ध है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए बनाई गई यह नई समिति ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्रों से मिलने वाले आवेदनों की बारीकी से जांच करेगी।
जानिए किन्हें सौंपी गई है इस नई पुनर्गठित समिति की जिम्मेदारी
इस कल्याणकारी योजना की नई समिति के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सामाजिक विज्ञान संकाय के एकीकृत ग्रामीण विकास केंद्र के डॉ. आलोक कुमार पाण्डेय को दी गई है। उनके साथ ही विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ प्रोफेसरों को भी इस टीम में महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
समिति के अन्य प्रमुख सदस्यों में कला संकाय के डॉ. ओम प्रकाश और डॉ. दिव्या भारती का नाम शामिल है। इनके साथ ही चिकित्सा विज्ञान संस्थान के डॉ. अरुण कुमार दुबे और सामाजिक विज्ञान संकाय के डॉ. स्वप्निल सिंह भी इस जांच प्रक्रिया और आवेदनों के मूल्यांकन में अपनी सेवाएं देंगे।
छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने और समय पर मदद पहुंचाने का है लक्ष्य
कल्याणकारी सेवा प्रकोष्ठ के छात्र परामर्शदाता श्री नित्यानन्द तिवारी को इस विशेष समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस समिति के गठन का मुख्य उद्देश्य यह है कि सभी वास्तविक और जरूरतमंद छात्रों को बिल्कुल सही समय पर आर्थिक मदद मिल सके।
यह योजना गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले मेधावी छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने में काफी मददगार साबित होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि पैसों की तंगी के कारण किसी भी योग्य छात्र की पढ़ाई बीच में नहीं छूटनी चाहिए। शिक्षा का अधिकार समाज के हर वर्ग को मिलना चाहिए।
पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता से की जाएगी सभी आवेदनों की जांच
इस नई समिति के सदस्यों के पास शैक्षणिक और सामाजिक कार्यों का एक लंबा अनुभव है। उनके इस अनुभव का सीधा लाभ योजना के सही कार्यान्वयन में देखने को मिलेगा। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि प्राप्त होने वाले सभी प्रार्थना पत्रों की पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ जांच की जाए।
इस गहन परीक्षण के बाद केवल उन्हीं विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा जो वास्तव में इस वित्तीय सहायता के पात्र हैं। इस पहल के माध्यम से काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने एक बार फिर साबित किया है कि वह शिक्षा के प्रसार के साथ-साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी पूरी गंभीरता से निभाता है।

