Mumbai News: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस समय एक अभूतपूर्व आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत के आयात बिल को बढ़ा दिया है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पैदा हो गया है। गिरते रुपये को संभालने के लिए आरबीआई लगातार कड़े कदम उठा रहा है।
डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये को सहारा देने के लिए केंद्रीय बैंक खुले बाजार में भारी नकदी डाल रहा है। केंद्रीय बैंक को अपने बहुमूल्य खजाने से हजारों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा खुले बाजार में बेचनी पड़ रही है। आरबीआई ने अकेले मार्च के महीने में ही करीब 20 अरब डॉलर बाजार में झोंक दिए हैं।
आरबीआई बुलेटिन में हुआ बड़ा खुलासा, मार्च में हुई रिकॉर्ड शुद्ध बिक्री
रिजर्व बैंक ने अपनी हालिया मासिक बुलेटिन में देश की मौजूदा वित्तीय स्थिति के आंकड़े जारी किए हैं। समीक्षा के मुताबिक मार्च में हाजिर मुद्रा बाजार में शुद्ध आधार पर 9.76 अरब डॉलर की बड़ी बिक्री की गई। इससे पहले केंद्रीय बैंक लगातार दो महीनों तक अमेरिकी डॉलर की शुद्ध खरीद कर रहा था।
इससे पहले फरवरी महीने में आरबीआई ने घरेलू बाजार से 7.41 अरब डॉलर खरीदे थे। लेकिन पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय मुद्रा पर दबाव अचानक बहुत बढ़ गया। इस भू-राजनीतिक संकट से निपटने के लिए मार्च में रिजर्व बैंक को डॉलर बेचकर रुपया खरीदना पड़ा।
आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार मार्च में केंद्रीय बैंक ने कुल 19.88 अरब डॉलर की खरीद की थी। इसके मुकाबले बैंक को बाजार में 29.64 अरब डॉलर बेचने पड़े। इस तरह शुद्ध रूप से कुल 9.76 अरब डॉलर यानी करीब 94 हजार करोड़ रुपये की भारी बिक्री दर्ज की गई है।
राहत भरा रहा अप्रैल का महीना, सुरक्षित है भारत का विदेशी मुद्रा भंडार
मार्च के मुकाबले अप्रैल महीने में डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की गिरावट थोड़ी थमी है। अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम की घोषणा से बाजार को बड़ी राहत मिली है। इसके साथ ही आरबीआई के समय पर किए गए उपायों ने रुपये की गिरावट को काफी हद तक सीमित कर दिया।
इसके बाद से रुपये की चाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के अनुसार ही बदल रही है। यह स्थिति सीधे तौर पर पश्चिम एशिया के ताजा हालातों को बयां करती है। वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (आरईईआर) के आधार पर भी अप्रैल में रुपये में कुछ कमजोरी देखी गई थी।
आरबीआई ने स्पष्ट किया कि इस कमजोरी का मुख्य कारण नाममात्र प्रभावी विनिमय दर (एनईईआर) में गिरावट रही है। इसके साथ ही देश के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की तुलना में मूल्य सूचकांक भी कम रहा। हालांकि इन तमाम चुनौतियों के बाद भी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बहुत मजबूत स्थिति में है।
अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान से मिली राहत और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में उछाल
मौजूदा खजाने की मदद से भारत आसानी से लगभग 11 महीने तक के आयात का भुगतान कर सकता है। यह मजबूत फंड देश के कुल बकाया विदेशी कर्ज का लगभग 90 फीसदी हिस्सा चुकाने के लिए काफी है। इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के एक बयान से वैश्विक बाजार को संजीवनी मिली है।
मार्को रुबियो ने संकेत दिया कि ईरान के साथ जारी कूटनीतिक वार्ता अब एक सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। इस बीच वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह काफी बेहतर रहा है। पिछले साल के मुकाबले कुल और शुद्ध दोनों आधार पर एफडीआई बढ़ा है।
मार्च में शुद्ध एफडीआई का प्रवाह लगातार दूसरे महीने सकारात्मक दर्ज किया गया है। हालांकि इस अवधि के दौरान सकल एफडीआई प्रवाह में मामूली सुस्ती जरूर देखी गई। राहत की बात यह है कि भारत से बाहर जाने वाले एफडीआई में कमी आई है, जिसका बड़ा हिस्सा सिंगापुर, यूएई और नीदरलैंड गया है।
Author: Rajesh Kumar

