मंत्री की गिरफ्तारी और केजरीवाल की ललकार! रंधावा सुसाइड केस में ‘आप’ ने चला सबसे बड़ा दांव, क्या भाजपा के पास है कोई जवाब?

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Punjab News: पंजाब की राजनीति में इस वक्त भूचाल आया हुआ है। पंजाब वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के अधिकारी गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या के मामले में पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर की गिरफ्तारी ने सबको चौंका दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के आदेश पर फतेहगढ़ साहिब पुलिस ने यह बड़ी कार्रवाई की है। इस गिरफ्तारी के तुरंत बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है।

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को न्याय की मिसाल बताया। उन्होंने लिखा कि हमारी सरकार ने अपने ही मंत्री के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कदम उठाया है। केजरीवाल के मुताबिक, आम आदमी पार्टी ने न केवल मंत्री को पद से हटाया, बल्कि उन्हें सलाखों के पीछे भी भेज दिया। उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी भ्रष्टाचार और प्रताड़ना के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलती है।

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केजरीवाल ने इस दौरान हरियाणा की एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि हरियाणा में एक एडीजीपी की खुदकुशी के बाद वहां की सरकार ने दोषियों को बचाने की कोशिश की थी। केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि यही फर्क है आम आदमी पार्टी और भाजपा में। एक तरफ जहां ‘आप’ अपनों पर भी कार्रवाई करती है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा अपनों को बचाने के लिए न्याय की बलि चढ़ा देती है।

मौत से पहले के ‘वीडियो’ ने खोल दी मंत्री की पोल

गगनदीप सिंह रंधावा ने 21 मार्च को दुनिया को अलविदा कह दिया था। उनकी मौत के बाद से ही पंजाब का सियासी पारा चढ़ा हुआ था। रंधावा ने खुदकुशी से पहले एक दर्दनाक वीडियो रिकॉर्ड किया था। इस वीडियो में उन्होंने कथित तौर पर पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर पर मानसिक प्रताड़ना और भारी दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए थे।

इस वीडियो के सामने आने के बाद रंधावा के परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने भुल्लर पर लगातार धमकी देने और काम में अड़ंगा डालने के आरोप लगाए। परिजनों का कहना है कि इसी मानसिक उत्पीड़न ने रंधावा को मौत के गले लगाने पर मजबूर कर दिया। पुलिस ने इस वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को अपनी जांच का मुख्य आधार बनाया है।

लालजीत भुल्लर की गिरफ्तारी को मान सरकार का एक बड़ा प्रशासनिक संदेश माना जा रहा है। जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे सुराग मिले जो मंत्री की संलिप्तता की ओर इशारा कर रहे थे। अब पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि रंधावा पर किस तरह का दबाव बनाया जा रहा था और इसमें कौन-कौन शामिल था।

सियासी जंग और ‘ईमानदार’ सरकार का दावा

इस गिरफ्तारी ने पंजाब में विपक्ष के उन आरोपों को भी कुंद कर दिया है जो सरकार पर अपनों को बचाने का आरोप लगा रहे थे। आम आदमी पार्टी अब इसे अपनी ‘ईमानदार’ छवि को मजबूत करने के मौके के रूप में देख रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कर दिया है कि कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति पद या कद से बड़ा नहीं है।

पंजाब की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक इस गिरफ्तारी की चर्चा हो रही है। लोग रंधावा के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं और सरकार की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना भी की जा रही है। हालांकि, भाजपा की ओर से केजरीवाल के आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक पलटवार सामने नहीं आया है।

रंधावा सुसाइड केस ने पंजाब के प्रशासनिक ढांचे में रसूखदारों के दखल की कहानी भी बयां की है। एक होनहार अधिकारी का इस तरह चले जाना सिस्टम की कमियों पर भी सवाल उठाता है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट में यह मामला क्या मोड़ लेता है और क्या रंधावा के परिवार को पूर्ण न्याय मिल पाता है।

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