ब्रिटेन की संसद में प्रधानमंत्री के अपमान पर सख्त कार्रवाई, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भारतीय नेताओं को दी बड़ी नसीहत

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Delhi News: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया के चौंतीस देश अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाज चुके हैं। इसके विपरीत देश के भीतर कुछ विपक्षी नेता लगातार उनके खिलाफ असंसदीय भाषा का प्रयोग करते हैं। इस रवैये पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखा पलटवार किया है।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने ब्रिटेन के वेस्टमिंस्टर पार्लियामेंट्री मॉडल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने भारतीय राजनेताओं को कड़ा संदेश देते हुए मर्यादित आचरण करने की नसीहत दी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत को भी प्रधानमंत्री पद की गरिमा के लिए यह ब्रिटिश सिस्टम अपनाना चाहिए।

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ब्रिटिश प्रधानमंत्री को झूठा कहने पर महिला सांसद निलंबित

यूके की संसद में अप्रैल महीने के दौरान एक महत्वपूर्ण डिबेट चल रही थी। इसी बहस के बीच पाकिस्तानी मूल की ब्रिटिश सांसद जारा सुल्ताना ने प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को निर्लज्ज झूठा कह दिया था। इस बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी पर हाउस के स्पीकर लिंडसे हॉयल ने तत्काल हस्तक्षेप किया।

स्पीकर ने महिला सांसद को अपना अमर्यादित बयान वापस लेने का कड़ा आदेश दिया। जब जारा सुल्ताना ने इससे साफ इनकार कर दिया, तो स्पीकर ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की। उन्होंने सांसद को तुरंत पांच दिनों के लिए सदन की कार्यवाही से सस्पेंड कर बाहर का रास्ता दिखा दिया।

यूके के कड़े नियम और भारतीय संसद की मौजूदा स्थिति

ब्रिटेन में असंसदीय भाषा को लेकर बेहद कड़े नियम लागू हैं। वहां संसद के भीतर किसी को झूठा या बेईमान कहने पर पूरी तरह पाबंदी है। ब्रिटिश परंपराओं के अनुसार आप सरकार की नीतियों की आलोचना तो कर सकते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत या निजी आक्षेप बिल्कुल नहीं लगा सकते।

इसके विपरीत भारत में नियम 380 और 381 के तहत अभद्र भाषा प्रतिबंधित तो है, लेकिन कड़े एक्शन नहीं होते। देश में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अधीर रंजन चौधरी जैसे विपक्षी नेता लगातार पीएम पर विवादित टिप्पणियां करते रहे हैं। यहां अक्सर राजनीतिक दबाव में केवल हंगामा होकर रह जाता है।

भारतीय संसद में अक्सर ऐसी अमर्यादित भाषा को केवल ऑन रिकॉर्ड कार्यवाही से हटा दिया जाता है। विपक्षी दल के हंगामे के डर से सांसदों पर वैसी कड़ी लीगल कार्रवाई नहीं हो पाती है। यही वजह है कि किरेन रिजिजू ने देश में एक जवाबदेह और मजबूत स्वदेशी संसदीय ढांचा बनाने की वकालत की है।

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