Delhi News: राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासन को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए उप-राज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने बड़ा फैसला लिया है। अब दिल्ली के पुनर्गठित जिलों में तैनात राजस्व और प्रशासनिक अधिकारियों को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियां दी जाएंगी। इससे जिलों में प्रशासनिक कामकाज और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में काफी मदद मिलेगी।
यह महत्वपूर्ण कदम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 14 के तहत उठाया गया है, जिसने पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता की जगह ली है। इस बदलाव से जिला मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, राजस्व सहायक और तहसीलदारों को उनके संबंधित क्षेत्रों में मजिस्ट्रेट के तौर पर कार्य करने और प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने का अधिकार मिल गया है।
बीएनएसएस के प्रावधानों के तहत मिला अधिकार
बीएनएसएस की धारा 14 राज्य सरकार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट और जिलाधिकारी नियुक्त करने का अधिकार देती है। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, दिल्ली में उप-राज्यपाल के पास यह शक्ति निहित है। उप-राज्यपाल की इस मंजूरी के बाद अब सरकार शीघ्र ही बीएनएसएस की धारा 14 के तहत विस्तृत आधिकारिक अधिसूचना जारी करेगी।
पिछले साल दिसंबर में राजस्व विभाग ने दिल्ली के जिलों का पुनर्गठन किया था। नए स्वरूप में प्रशासनिक सेवाएं बेहतर ढंग से लोगों तक पहुंचे, इसके लिए इन शक्तियों का हस्तांतरण आवश्यक था। इससे पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और गृह मंत्री आशीष सूद ने भी इस प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति प्रदान की थी।
प्रशासनिक कामकाज में आएगी अधिक गति
पुनर्गठित जिलों में मजिस्ट्रेट शक्तियां मिलने से कामकाज की गति बढ़ेगी। इससे न केवल कानून-व्यवस्था पर पकड़ मजबूत होगी, बल्कि जनता को भी सरकारी सेवाएं आसानी से मिल सकेंगी। मजिस्ट्रेट शक्तियां होने से अधिकारी किसी भी आपात स्थिति या जनहित से जुड़े मामलों में त्वरित निर्णय ले सकेंगे और बेहतर समन्वय स्थापित कर पाएंगे।
यह प्रशासनिक फेरबदल दिल्ली सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत सेवाओं का विकेंद्रीकरण किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इन शक्तियों के औपचारिक रूप से सौंपे जाने के बाद प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और प्रभावी होंगी। सरकार अब पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए आगे के दिशा-निर्देश जल्द जारी करेगी।

