New Delhi News: भारत ने कराची में पाकिस्तान रेंजर्स के कैंप पर हुए आतंकवादी हमले को लेकर इस्लामाबाद के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। नई दिल्ली ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय पाकिस्तान को अपनी जमीन पर सक्रिय आतंकी ढांचे पर एक्शन लेना चाहिए।
विदेश मंत्रालय के ऑफिशियल प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पाकिस्तान के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। भारत सरकार इन दावों को पूरी तरह खारिज करती है। उन्होंने पड़ोसी मुल्क को नसीहत दी कि वह इस तरह के झूठे बयानों से अपनी प्रशासनिक कमियों को छिपा नहीं सकता है।
पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग ने ही खोली पोल
हैरानी की बात यह है कि खुद पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग आईएसपीआर ने इस घटना की सच्चाई कुछ और ही बताई है। मिलिट्री विंग के आधिकारिक बयान के मुताबिक यह आत्मघाती हमला प्रतिबंधित संगठन ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ से जुड़े एक गुट ‘जमात-उल-अहरार’ के आतंकवादियों ने अंजाम दिया था।
इसके बावजूद पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने बिना किसी ठोस फॉरेंसिक प्रमाण या सबूत के इस हमले के पीछे सीधे ‘भारतीय कनेक्शन’ होने का मनगढ़ंत दावा कर दिया। पाकिस्तानी हुक्मरानों की इसी गैरजिम्मेदाराना आदत और प्रोपेगैंडा पर भारत के विदेश मंत्रालय ने अपनी तीखी और स्पष्ट प्रतिक्रिया जारी की है।
मुठभेड़ में छह उग्रवादी ढेर और चार जवानों की मौत
सुरक्षा बलों के मुताबिक भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने सिंध रेंजर्स के भिट्टाई विंग मुख्यालय को निशाना बनाया था। इसके बाद करीब नब्बे मिनट तक चली भीषण गोलीबारी में सुरक्षा बलों ने छह आतंकवादियों को मार गिराया। सुरक्षाबलों ने एक घायल उग्रवादी को जिंदा गिरफ्तार भी कर लिया है।
इस घातक मुठभेड़ में पाकिस्तान के चार अर्धसैनिक जवान भी मारे गए हैं। अक्टूबर 2024 के बाद कराची शहर में इसे सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है। शुरुआती पुलिस इन्वेस्टिगेशन में सामने आया है कि आतंकवादियों ने एक व्हीकल से रेंजर्स मुख्यालय के मेन गेट को बुरी तरह तोड़ दिया था।
परिसर में प्रवेश करते ही उग्रवादियों ने अंधाधुंध हैंड ग्रेनेड फेंके, जिससे कई बड़े ब्लास्ट हुए और पूरे कैंप में अफरातफरी मच गई। घटना की लाइव लोकेशन पर तुरंत रेस्क्यू 1122 सिंध की टीमें पहुंच गईं। उन्होंने इलाके को कॉर्डन ऑफ कर तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है।

