National News: भारत की ‘रॉकेट वुमन’ के नाम से मशहूर अंतरिक्ष वैज्ञानिक नंदिनी हरिनाथ ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर देश का मान बढ़ाया है। भारत के ऐतिहासिक मंगलयान मिशन के समय उनके द्वारा पहनी गई साड़ी अब अमेरिका के प्रतिष्ठित स्मिथसोनियन नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम की शोभा बढ़ा रही है। वाशिंगटन डीसी स्थित इस संग्रहालय में इसे विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है।
नंदिनी हरिनाथ भारत के पहले मार्स आर्बिटर मिशन (मंगलयान) में उप संचालन निदेशक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रही थीं। देश के इस महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन के दौरान, 1 दिसंबर 2013 का दिन बेहद ऐतिहासिक था। इसी खास दिन नंदिनी चमकीले लाल और नीले रंग की बेहद खूबसूरत रेशमी साड़ी पहनकर इसरो के नियंत्रण कक्ष पहुंची थीं।
दरअसल, 1 दिसंबर 2013 को ही मंगलयान ने पृथ्वी की कक्षा को छोड़कर मंगल ग्रह की अपनी लंबी यात्रा शुरू की थी। उस निर्णायक दिन नंदिनी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अन्य शीर्ष वैज्ञानिक अंतरिक्षयान को सही दिशा देने के लिए लगातार नियंत्रण कक्ष में मुस्तैद थे। यह पल पूरी टीम के लिए बेहद भावुक करने वाला था।
नंदिनी ने बाद में बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में बताया था कि वह पल पूरी टीम के लिए ‘करो या मरो’ जैसा था। पूरे मिशन की अंतिम सफलता काफी हद तक उसी दिन की सटीक गणना और संचालन पर टिकी हुई थी। इस मिशन के सफल होते ही साड़ी पहने महिला वैज्ञानिकों के जश्न की तस्वीरें पूरी दुनिया में छा गई थीं।
अमेरिकी क्यूरेटर को बेहद आकर्षक लगी भारतीय वैज्ञानिकों की यह तस्वीर
स्मिथसोनियन संग्रहालय के क्यूरेटर मैट शिंडेल ने बताया कि इंटरनेट पर प्रसारित हुई वह तस्वीर उन्हें बेहद आकर्षक लगी थी। उन्होंने सोचा कि इसके पीछे जरूर एक शानदार मानवीय कहानी छिपी है। इसके बाद शिंडेल ने साल 2020 में ईमेल के जरिए नंदिनी हरिनाथ से संपर्क किया और इस गौरवशाली सफर को प्रदर्शित करने की इच्छा जताई।
क्यूरेटर ने नंदिनी से पूछा कि वह इस ऐतिहासिक मिशन की याद के तौर पर कौन सी वस्तु देना चाहेंगी। नंदिनी सहर्ष अपनी वह ऐतिहासिक रेशमी साड़ी और मैचिंग ब्लाउज देने के लिए तैयार हो गईं। गौरतलब है कि भारत ने 24 सितंबर 2014 को अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुंचकर दुनिया में इतिहास रच दिया था।
अमेरिकी संग्रहालय में रखी यह साड़ी मुख्य रूप से दो बेहद महत्वपूर्ण बातों को दर्शाती है। पहला, यह भारत के सफल अंतरिक्ष कार्यक्रम और राष्ट्रीय गौरव का एक बड़ा प्रतीक है। दूसरा, यह दुनिया भर की महिलाओं को विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में अपना करियर बनाने और देश का नाम रोशन करने की अद्भुत प्रेरणा देती है।
Author: Pallavi Sharma

