Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एसोसिएशन का साफ कहना है कि विभाग के कुछ अधिकारी जानबूझकर बुजुर्ग पेंशनरों के वित्तीय मामलों को अटका रहे हैं। आहरण एवं वितरण अधिकारी रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन केस महालेखाकार कार्यालय को समय पर नहीं भेज रहे हैं, जिससे पेंशनर्स बेहद परेशान हैं।
अधिकारियों पर नियमों की अनदेखी का गंभीर आरोप
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गंगा राम शर्मा और महासचिव भूप राम वर्मा ने इस लेती-लतीफी पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने बताया कि विभाग के अधिकारी विशेष रूप से उन पेंशनर्स के मामलों को रोक रहे हैं, जिनकी नियमित सेवा अवधि कॉन्ट्रैक्ट पॉलिसी के तहत दस वर्ष से कम रही है। अधिकारी सरकारी नियमों को ताक पर रख रहे हैं।
उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसलों का खुला उल्लंघन
पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने शीला देवी बनाम सरकार मामले में कॉन्ट्रैक्ट सेवा को पेंशन के लिए जोड़ने का स्पष्ट निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने भी इक्कीस फरवरी दो हजार छब्बीस को इस संबंध में जारी अपनी अधिसूचना को वापस ले लिया है। इसके बावजूद कुछ अधिकारी नियमों के खिलाफ जाकर अपनी मनमानी पर अड़े हैं।
कोटला में पेंशनर्स ने उठाईं विभिन्न वित्तीय मांगें
दूसरी तरफ जिला कांगड़ा के कोटला विश्राम गृह में पेंशनर संघ की एक महत्वपूर्ण त्रैमासिक बैठक सुशील शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में पेंशनरों ने अपनी लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की। पेंशनर्स ने सरकार से पंद्रह प्रतिशत बकाया महंगाई भत्ते के एरियर और वर्ष दो हजार सोलह से बाइस तक के वित्तीय लाभ तुरंत देने की मांग की।

