रीठट गांव में जल जीवन मिशन का बुरा हाल, 50 लाख खर्च होने के बाद भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग

Nuh News: सरकार ग्रामीण इलाकों में हर घर तक साफ पानी पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है। हालांकि रीठट गांव में इसकी जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट दिखाई देती है। करीब 15 हजार की आबादी वाला यह गांव आज भी रेनीवेल परियोजना के मीठे पानी के लिए तरस रहा है।

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ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि प्रशासन ने गांव में जलापूर्ति के नाम पर करीब 50 लाख रुपये पानी की तरह बहा दिए। इसके बावजूद जल जीवन मिशन के अधूरे और कछुआ चाल से चल रहे कार्यों के कारण इस महत्वपूर्ण योजना का कोई लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल सका है।

मजबूरी में नहर किनारे का दूषित और केमिकलयुक्त पानी पी रहे ग्रामीण

गांव में पीने के साफ पानी का कोई दूसरा सरकारी विकल्प मौजूद नहीं है। इस वजह से ग्रामीणों को रोजाना भारी दिक्कतों से दो-चार होना पड़ रहा है। लोग मजबूरी में नहर के किनारे लगे प्राइवेट ट्यूबवेलों का बेहद अशुद्ध पानी पीने को पूरी तरह विवश हैं।

ग्रामीणों के अनुसार इस ट्यूबवेल के पानी से भारी बदबू आती है। इसमें केमिकल्स मिले होने की पूरी आशंका बनी रहती है। इस दूषित पानी के लगातार इस्तेमाल से गांव में गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है, जिससे लोग डरे हुए हैं।

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प्रशासनिक लापरवाही से बंद पड़े हैं तीन बड़े बूस्टिंग स्टेशन

आर्थिक रूप से सक्षम लोग करीब 1,000 रुपये चुकाकर निजी पानी के टैंकर मंगा रहे हैं। ग्रामीणों ने जनस्वास्थ्य विभाग के प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि गांव में चार बूस्टिंग स्टेशन तो तैयार किए गए हैं, लेकिन वहां बुनियादी व्यवस्था करना प्रशासन भूल गया है।

इन चार स्टेशनों में से केवल एक पर ही ऑपरेटर तैनात है। बाकी तीन स्टेशन लंबे समय से पूरी तरह बंद पड़े हैं। चालू स्टेशन पर भी कभी-कभार ही सप्लाई आती है, लेकिन पाइपलाइन की गड़बड़ी के कारण पानी घरों तक बिल्कुल नहीं पहुंच पाता।

चार साल पहले बिछी पाइपलाइन में आज तक नहीं आया पानी

स्थानीय निवासी हाफिज ईशा, जाकिर हुसैन, हनीफ और खालिद सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि करीब चार साल पहले यहां पाइपलाइन बिछाई गई थी। कुछ घरों में औपचारिकता पूरी करने के लिए नल भी लगा दिए गए, लेकिन आज तक उनमें पानी नहीं आया।

ग्रामीणों का कहना है कि विभाग के आला अधिकारी सिर्फ कागजी फाइलों में गांव को रेनीवेल का पानी देने के दावे कर रहे हैं। धरातल पर लोग बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।

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