Chandigarh News: हरियाणा सरकार ने बागवानी क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में अब बिना लाइसेंस के कोई भी बागवानी नर्सरी संचालित नहीं की जा सकेगी। इसके साथ ही पहली बार फलदार पौधों पर वॉटरप्रूफ लेबल या क्यूआर कोड लगाना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।
किसानों को मिलेंगे प्रमाणित और रोगमुक्त पौधे
कृषि विभाग ने हरियाणा हॉर्टिकल्चर नर्सरी नियम-2026 की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इन नए कड़े नियमों का मुख्य उद्देश्य किसानों और आम उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण, प्रमाणित और रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराना है। क्यूआर कोड की मदद से हर पौधे की सटीक पहचान सुनिश्चित की जाएगी।
नर्सरी के लिए लाइसेंस फीस और समय सीमा तय
सरकार ने फलदार पौधों की नर्सरी के लिए 20 हजार रुपये और अन्य सामान्य पौधों की नर्सरी के लिए 10 हजार रुपये का लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया है। प्रत्येक जारी लाइसेंस पांच वर्ष की अवधि के लिए मान्य रहेगा। इसके बाद इसे रिन्यू कराना होगा।
ऑनलाइन पोर्टल पर करना होगा आवेदन
लाइसेंस के लिए नर्सरी संचालकों को केवल hortharyana.gov.in पर ऑनलाइन मोड में ही आवेदन करना होगा। पांच साल बाद नवीनीकरण (रिन्यूअल) शुल्क फलदार पौधों के लिए 10 हजार रुपये और अन्य पौधों के लिए 5 हजार रुपये तय किया गया है।
गलत या घटिया पौधा बेचने पर मिलेगा दोगुना मुआवजा
यदि कोई नर्सरी संचालक बिल में दर्ज किस्म के बजाय दूसरी घटिया या संक्रमित किस्म का पौधा बेचता है, तो खरीदार सक्षम प्राधिकारी के पास शिकायत दर्ज करा सकता है। ऐसे मामलों में प्रभावित किसान को खेती की लागत के बराबर या अधिकतम दोगुना मुआवजा दिया जाएगा।

