Lucknow News: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने टेरर फंडिंग और अवैध घुसपैठ नेटवर्क से जुड़े मामले में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और हरियाणा सहित कई राज्यों के 13 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा है।
यह पूरा मामला म्यांमार के रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ कराने से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश एटीएस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक, एक संगठित गिरोह इन घुसपैठियों की मदद कर रहा था। यह गिरोह उनके लिए फर्जी भारतीय पहचान दस्तावेज तैयार कराता था।
अवैध घुसपैठियों को देश में बसाने वाले गिरोह का भंडाफोड़
जांच अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह अवैध रूप से आए लोगों को देश के अलग-अलग हिस्सों में बसाने में मदद कर रहा था। चूंकि मामला बड़े पैमाने पर धन के अवैध लेनदेन यानी मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा था, इसलिए ईडी ने इस पूरे नेटवर्क की जांच अपने हाथ में ली थी।
अधिकारियों ने बताया कि यह मामला करीब दो साल पहले सामने आया था। शुरुआत में यूपी एटीएस ने इस नेटवर्क को लेकर एफआईआर दर्ज की थी। अब ईडी की जांच में एक बहुत बड़े और गहरे वित्तीय नेटवर्क का पता चला है, जो इस पूरे खेल को चला रहा था।
चैरिटेबल ट्रस्ट और संस्थाओं को मिल रहा था विदेशी चंदा
इस संदिग्ध नेटवर्क में कुछ चैरिटेबल ट्रस्ट और सामाजिक संस्थाएं भी शामिल हैं। इन संस्थाओं पर आरोप है कि इन्हें भारी मात्रा में विदेशी चंदा मिलता था। वे इस पैसे का इस्तेमाल भारत में राष्ट्र विरोधी और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए करते थे।
फंडिंग को छिपाने के लिए कई बैंक खातों और ‘म्यूल अकाउंट्स’ (दूसरों के नाम पर खोले गए फर्जी खाते) का सहारा लिया गया। आरोपियों ने कई चरणों में पैसे का ट्रांजैक्शन किया। जांच में यह भी सामने आया है कि संदिग्धों को नकद और छोटे ट्रांसफर के जरिए पैसे भेजे गए।

