Chandigarh News: मनी लांड्रिंग मामले में पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच का दायरा और व्यापक कर दिया है। केंद्रीय एजेंसी अब वर्ष 2019 के बाद मंजूर की गई विभिन्न बड़ी रियल एस्टेट परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच में जुट गई है।
इसी कड़ी में ईडी ने ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) से कई महत्वपूर्ण फाइलें और रिकॉर्ड अपने कब्जे में मांगे हैं। एजेंसी ने विशेष रूप से डेरा बस्सी के कराला गांव स्थित चंडीगढ़ रायल सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेज तलब किए हैं। इसमें चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) और कालोनी डेवलपमेंट लाइसेंस की फाइलें शामिल हैं।
अधिकारियों से पूछताछ और रिकॉर्ड की जांच शुरू
जांच एजेंसी गमाडा और प्रोजेक्ट प्रमोटरों के बीच बाहरी विकास शुल्क (ईडीसी) तथा अन्य वित्तीय देनदारियों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही है। सूत्रों का कहना है कि ईडी यह पड़ताल कर रही है कि विभिन्न परियोजनाओं में स्वीकृतियों की प्रक्रिया, वित्तीय लेनदेन और फंड के उपयोग में कहीं कोई बड़ी अनियमितता तो नहीं हुई है।
मामले की तह तक जाने के लिए गमाडा के लेखा शाखा और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अधिकारियों को लगातार पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है। उनसे दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है। चंडीगढ़ रायल सिटी प्रोजेक्ट पहले से ही जांच एजेंसियों के रडार पर है, जिससे अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
32 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का है मामला
जुलाई 2025 में पंजाब पुलिस ने इस प्रोजेक्ट से जुड़े 32.67 करोड़ रुपये के कथित बाउंस चेक, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों में मुख्य मामला दर्ज किया था। इसी एफआईआर को आधार बनाते हुए ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपनी स्वतंत्र जांच शुरू की थी।
एजेंसी परियोजना से जुड़े कथित फंड डायवर्जन और गमाडा के बकाया भुगतान न करने की भी जांच कर रही है। इस मामले में रायल एस्टेट ग्रुप से जुड़े प्रमोटर प्रवीण कंसल और नीरज कंसल को 30 मई को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। दोनों प्रमोटर फिलहाल कोर्ट के आदेश पर न्यायिक हिरासत में जेल में हैं।
मंत्री के करीबियों के ठिकानों पर ईडी की दबिश
इससे पहले ईडी चंडीगढ़, मोहाली, जीरकपुर और पंजाब के अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर इस समूह से जुड़े ठिकानों पर बड़ी छापेमारी कर चुकी है। उधर, संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद से ईडी लगातार उनके करीबियों के घरों और व्यावसायिक कार्यालयों में भी दबिश दे रही है, जिससे हड़कंप मचा हुआ है।
जांच एजेंसी अब रियल एस्टेट परियोजनाओं की स्वीकृतियों, वित्तीय लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की कड़ियों को आपस में जोड़ रही है। ईडी का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक संरक्षण में किए गए इस पूरे घोटाले की तह तक पहुंचना है। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े रसूखदारों पर कार्रवाई हो सकती है।
Author: Gurpreet Singh

