Kanker News: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां के पीढ़ापाल अनुसूचित क्षेत्र में धर्मांतरण के विरोध में 26 ग्राम सभाएं एकजुट हो गई हैं। मुरागांव में हुई एक पारंपरिक संयुक्त ग्राम सभा में सर्वसम्मति से ईसाई चर्च, प्रार्थना सभाओं और पादरियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया है।
इस ऐतिहासिक और बड़े फैसले के बाद अब इस प्रस्ताव को कलेक्टर, एसडीएम और संबंधित विभागों को सौंपने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस संयुक्त ग्राम सभा में क्षेत्र के सरपंच, पंच, गायता, पटेल, ठाकुर, भूमियार, मांझी, सिरहा, भगत और सर्व समाज के तमाम प्रमुख लोग शामिल हुए। इस बैठक की अध्यक्षता मुरागांव के ग्राम सभा अध्यक्ष ने की।
आरक्षण खत्म करने और डी-लिस्टिंग की उठी मांग
ग्राम सभा में केवल प्रतिबंध ही नहीं लगाया गया, बल्कि कई और कड़े संकल्प भी लिए गए हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि धर्मांतरण कर चुके लोगों को अनुसूचित क्षेत्र में कोई भूमि नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही, जो लोग धर्मांतरण करने के बाद भी अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं, उनकी डी-लिस्टिंग करने की मांग की गई है।
इस बैठक में आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर काफी लंबी चर्चा हुई। सर्व समाज के प्रमुखों का कहना है कि धर्मांतरण करने वाले लोगों के जाति प्रमाण पत्र तुरंत निरस्त किए जाने चाहिए। इसके अलावा, यदि कोई शासकीय कर्मचारी धर्मांतरण करता है, तो उसकी पूरी सूचना सीधे जिला प्रशासन को देने का सख्त निर्णय भी लिया गया है।
सेवा और स्वास्थ्य की आड़ में खेल का आरोप
ग्राम सभा के नेताओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस पूरे क्षेत्र में सेवा और स्वास्थ्य के नाम पर अवैध रूप से धर्मांतरण का खेल चलाया जा रहा है। इससे हमारी पारंपरिक आस्था और संस्कृति पर सीधा हमला हो रहा है। इसके कारण शांत आदिवासी समाज में आपसी विवाद और हिंसक घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
आदिवासी जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रमुखों ने जिला प्रशासन से इस संवेदनशील मामले पर तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने मांग की है कि क्षेत्र की शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अवैध धर्मांतरण पर तत्काल रोक लगाई जाए। इस बड़े कदम के बाद से पूरे कांकेर जिले में हलचल काफी तेज हो गई है।
Author: Anjali Sahu

