हिमाचल में आलू की फसल पर ‘लेट ब्लाइट’ बीमारी का खतरा, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने किसानों के लिए जारी की एडवाइजरी

Shimla News: केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के शिमला प्रभाग ने हिमाचल प्रदेश के आलू उत्पादकों को ‘लेट ब्लाइट’ बीमारी के संभावित प्रकोप को लेकर सतर्क किया है। संस्थान ने किसानों को अलर्ट जारी कर फसलों को बचाने के लिए तुरंत जरूरी कदम उठाने और वैज्ञानिक सलाह मानने का आग्रह किया है।

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यह खतरनाक बीमारी आलू और टमाटर की फसलों में ‘फाइटोफ्थोरा इन्फेस्टन्स’ नामक फंगस के कारण फैलती है। ठंडे, नम और लगातार बारिश वाले मौसम में यह संक्रमण तेजी से बढ़ता है। यह जानलेवा फंगस पूरी की पूरी हरी-भरी फसल को कुछ ही दिनों के भीतर पूरी तरह नष्ट कर सकता है

मौजूदा मौसम में बढ़ गया है बीमारी का बड़ा खतरा

संस्थान के ‘इंडो-ब्लाइटकास्ट’ पूर्वानुमान मॉडल के अनुसार वर्तमान मौसमी परिस्थितियां इस बीमारी के फैलने के लिए बिल्कुल अनुकूल हैं। सीपीआरआई के पादप संरक्षण प्रभाग के प्रमुख संजीव शर्मा ने सोमवार को किसानों से समय रहते एहतियाती उपाय अपनाने और खेतों की नियमित निगरानी करने की विशेष सलाह दी है।

विशेषज्ञों ने कहा कि जिन खेतों में अभी लक्षण नहीं दिखे हैं, वहां फफूंदनाशी का छिड़काव करें। संवेदनशील आलू की किस्मों को बचाने के लिए ‘मैनकोजेब’ या ‘क्लोरोथालोनिल’ युक्त रसायनों का उपयोग करें। इसकी सही मात्रा 0.2 से 0.25 प्रतिशत यानी प्रति हेक्टेयर 1000 लीटर पानी में 2.0 से 2.5 किलोग्राम होनी चाहिए।

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हजारों हेक्टेयर आलू की खेती पर मंडराया संकट

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सामान्य तौर पर इस फफूंदनाशी के छिड़काव को 10 दिनों के अंतराल पर दोहराया जाना चाहिए। हालांकि बीमारी की गंभीरता को देखते हुए इस समय सीमा में बदलाव किया जा सकता है। राज्य के शिमला, सिरमौर, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों के करीब 15,000 हेक्टेयर में आलू उगाया जाता है।

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