Shimla News: हिमाचल प्रदेश पुलिस एक बार फिर सुर्खियों में है। विभाग अपने प्रसिद्ध पुलिस म्यूजिकल बैंड ‘हार्मनी ऑफ पाइन्स’ के प्रमुख इंस्पेक्टर विजय कुमार के खिलाफ जांच कर रहा है। इंटरनेट मीडिया से कमाई और निजी तौर पर वीडियो एल्बम बनाने के आरोप में उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
पुलिस महानिदेशक कार्यालय इस बात की पड़ताल कर रहा है कि वीडियो बनाने के लिए सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी ली गई थी या नहीं। इस बीच सरकार ने एक सख्त आदेश जारी किया है। सभी विभाग प्रमुखों को ऐसे कर्मचारियों की सूची भेजने को कहा गया है जो अन्य स्रोतों से कमाई कर रहे हैं।
जानिए कब हुई थी इस पुलिस बैंड की स्थापना
इस विख्यात पुलिस बैंड ‘हार्मनी ऑफ पाइन्स’ की स्थापना वर्ष 1996 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य पुलिस कर्मियों का मनोरंजन करना था। साल 2016 में इसे दोबारा पुनर्जीवित किया गया था। इसके बाद पूर्व डीजीपी संजय कुंडू ने बेहतरीन प्रतिभाओं को शामिल कर इसे पूरी तरह पेशेवर रूप दिया।
इस बैंड ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़ी उपलब्धियां अपने नाम की हैं। यह कलर्स टीवी के लोकप्रिय शो ‘हुनरबाज देश की शान’ के फाइनल तक पहुंचा था। इसके नाम पर डाक टिकट भी जारी हुआ था। विजय कुमार को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित भी किया जा चुका है।
कमाई और नियमों को लेकर उठ रहे हैं कई सवाल
विजय कुमार पहले ही फेसबुक से हुई छह हजार रुपये की कमाई सरकारी खजाने में जमा करवा चुके हैं। नियमों के मुताबिक सरकारी अधिकारी यदि अन्य स्रोतों से वैध कमाई करते हैं, तो उन्हें उसका एक तिहाई हिस्सा सरकारी खजाने में जमा करवाना अनिवार्य होता है।
हालांकि चर्चा इस बात पर भी हो रही है कि यह नियम बोर्ड बैठकों में शामिल होने वाले बड़े प्रशासनिक अधिकारियों पर क्यों लागू नहीं होता। इसके अलावा कई प्रशासनिक अधिकारी रील बनाकर सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स जुटाते हैं। फिलहाल विभाग ने इस मामले में गहन जांच शुरू कर दी है।
नौ महीने पहले वीआरएस के आवेदन को किया था खारिज
हैरानी की बात यह है कि विजय कुमार ने नौ महीने पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के लिए आवेदन किया था। उस समय विभाग ने यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया था कि उनके जाने से पुलिस की छवि पर असर पड़ेगा। लेकिन अब उन्हें ही विभागीय जांच का सामना करना पड़ रहा है।
निलंबन के दौरान कर्मचारी को आधा वेतन मिलता है और यह सरकार पर एक तरह का वित्तीय बोझ होता है। आचरण संहिता के तहत साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक कार्यों के लिए कुछ छूट भी दी गई है। फिलहाल हर किसी को अब इस जांच के अंतिम निष्कर्ष का इंतजार है।

