Palampur News: कारगिल युद्ध के महान नायक और परमवीर चक्र से सम्मानित शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में जन्मे इस जांबाज सैनिक ने साल 1999 के युद्ध में अदम्य साहस दिखाते हुए दुश्मन के दांत खट्टे किए थे।
कैप्टन बत्रा की अद्भुत वीरता, कुशल नेतृत्व क्षमता और देश के प्रति सर्वोच्च समर्पण ने उन्हें भारतीय सैन्य इतिहास में हमेशा के लिए अमर कर दिया। उनके पराक्रम की गाथाएं आज भी हर नागरिक के रोंगटे खड़े कर देती हैं। पूरा देश इस वीर सपूत के महान बलिदान का हमेशा ऋणी रहेगा।
प्वाइंट 5140 पर फहराया था तिरंगा, दिया अमर उद्घोष
युद्ध के दौरान अत्यंत दुर्गम प्वाइंट 5140 पर ऐतिहासिक विजय हासिल करने के बाद उनका प्रसिद्ध उद्घोष “यह दिल मांगे मोर” पूरे देश में गूंज उठा था। यह नारा भारतीय सेना के बढ़ते हौसले और अटूट देशभक्ति का एक जीवंत प्रतीक बन गया, जिसने हर नागरिक में नया जोश भर दिया।
इसके बाद एक और बेहद कठिन चोटी प्वाइंट 4875 पर पाकिस्तानी घुसपैठियों से लोहा लेते हुए 7 जुलाई 1999 को उन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दे दिया। भारत सरकार ने उनके इस अदम्य शौर्य के लिए उन्हें मरणोपरांत देश का सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र प्रदान किया।
राजकीय महाविद्यालय पालमपुर में युवाओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा का गौरवशाली जीवन आज भी देश के करोड़ों युवाओं को राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की सच्ची सीख देता है। इस विशेष अवसर पर विभिन्न शिक्षण संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और सामाजिक संगठनों द्वारा कई भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभाओं का गरिमामयी आयोजन किया गया।
पालमपुर स्थित बलिदानी कैप्टन विक्रम बत्रा राजकीय महाविद्यालय में मंगलवार को देशभक्ति से ओतप्रोत एक विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ। कॉलेज परिसर में स्थापित शहीद की भव्य प्रतिमा पर सभी ने पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान एनसीसी कैडेट्स और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं वहां भावुक नजर आए।
प्राचार्य पंकज सूद ने विद्यार्थियों से किया खास आह्वान
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कॉलेज के प्राचार्य प्रो. पंकज सूद ने कहा कि कैप्टन बत्रा का सर्वोच्च बलिदान भारतीय युवाओं का सदैव मार्गदर्शन करता रहेगा। कारगिल के युद्ध मैदान में उन्होंने जो अद्भुत पराक्रम दिखाया, उसकी मिसाल पूरी दुनिया के सैन्य इतिहास में मिलना बेहद मुश्किल है।
प्रो. सूद ने सभी विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे शहीद के पदचिह्नों पर चलकर अपने जीवन में साहस, अनुशासन और सेवा-भाव जैसे आदर्शों को अपनाएं। उपस्थित सभी एनसीसी कैडेट्स और प्राध्यापकों ने देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहने का सामूहिक संकल्प लिया।

