कांगड़ा के वज्रेश्वरी देवी मंदिर में स्थापित भैरव बाबा की मूर्ति से टपकता है पसीना, संकट आने का मिलता है पूर्व संकेत

Kangra News: हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक कांगड़ा जिले में स्थित मां वज्रेश्वरी देवी मंदिर अपनी पौराणिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थापित भगवान भैरव की पावन मूर्ति सदियों से अद्भुत रहस्यों का केंद्र बनी हुई है। मान्यता के अनुसार, देश पर आने वाली किसी भी बड़ी विपदा से पहले इस पथरीली प्रतिमा से स्वतः पसीना बहने लगता है।

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इस चमत्कारी घटना को लेकर स्थानीय नागरिकों और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं में बहुत गहरी आस्था है। मंदिर के पुराने सेवादार बताते हैं कि आगामी प्राकृतिक आपदा या बड़े संकट की आहट मिलते ही इस ठोस प्रतिमा से पानी की बूंदें गिरने लगती हैं। कई बार प्रतिमा की आंखों से आंसू भी बहते हैं।

संकट की आहट मिलते ही सचेत हो जाते हैं पुजारी

भैरव बाबा की प्रतिमा से जैसे ही पानी टपकना शुरू होता है, वैसे ही मंदिर के मुख्य पुजारी पूरी तरह मुस्तैद हो जाते हैं। वे आने वाले खतरे को भांपकर लोक कल्याण के लिए तुरंत विशेष पूजा-अर्चना आरंभ कर देते हैं। इस गुप्त अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य संभावित संकट को टालना होता है।

इस विस्मयकारी चेतावनी का सबसे बड़ा ऐतिहासिक प्रमाण वर्ष 1905 के विनाशकारी भूकंप के दौरान देखने को मिला था। तब कांगड़ा में आए उस भयानक भूकंप से कुछ दिन पहले ही इस पावन मूर्ति से लगातार पसीना आ रहा था। हालांकि, उस समय लोग इस दुर्लभ संकेत को सही समय पर समझ नहीं पाए थे।

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आधुनिक विज्ञान के पास नहीं है इसका कोई सटीक जवाब

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कई बड़े शोधकर्ताओं ने इस रहस्यमयी घटना के पीछे की मुख्य वजह जानने का प्रयास किया है। कुछ वैज्ञानिक इसे हवा में मौजूद नमी या पत्थरों की रासायनिक प्रतिक्रिया का परिणाम मानते हैं। इसके बावजूद, विज्ञान इस बात को साबित नहीं कर पाया कि यह केवल संकट के समय क्यों होता है।

इस अद्भुत रहस्य के कारण आज के इस आधुनिक युग में भी यह पवित्र स्थल करोड़ों भक्तों की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र बना हुआ है। लोग इस व्यवस्था को दैवीय शक्ति का सीधा आशीर्वाद मानते हैं। यह खबर धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय इतिहास पर आधारित है, जिसका उद्देश्य केवल पाठकों को सूचित करना है।

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