वैज्ञानिकों ने खोजी हिमालय की बर्फबारी मापने की नई तकनीक, अब नदियों में पानी की उपलब्धता का लगेगा सटीक अनुमान

Shimla News: वैज्ञानिकों ने हिमालय क्षेत्र में होने वाली बर्फबारी को सटीक तरीके से मापने की एक नई और आधुनिक तकनीक विकसित की है। इस सफल शोध से भविष्य में नदियों के जल स्तर और पानी की कुल उपलब्धता का सही अनुमान लगाने में बड़ी मदद मिलेगी।

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सर्दियों की बर्फ ही बनाए रखती है जल प्रवाह

हिमालय से निकलने वाली गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियां करोड़ों लोगों के लिए बेहद जरूरी हैं। सर्दियों की बर्फ गर्मियों में पिघलकर नदियों का जल प्रवाह बनाए रखती है। यह रिसर्च हाल ही में मंथली वेदर रिव्यू नामक प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित की गई है।

पुराने उपकरणों से नहीं मिलते थे सही आंकड़े

कठिन पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी को मापना हमेशा से ही एक बड़ी चुनौती रहा है। पहले उपयोग होने वाले छोटे पारंपरिक उपकरण तेज हवा और भारी बर्फबारी के सटीक आंकड़े नहीं दे पाते थे। इस वजह से जल स्रोतों का अनुमान 50 से 100 प्रतिशत तक कम रहता था।

हिमाचल और नेपाल की झीलों में लगे सेंसर

वैज्ञानिकों की टीम ने इस समस्या को सुलझाने के लिए नई तकनीक तैयार की है। इसके तहत हिमाचल प्रदेश की घेपन और हम्पटा झीलों तथा नेपाल की मुगु झील के भीतर वाटर प्रेशर सेंसर लगाए गए हैं। यह प्रणाली झील पर जमा बर्फ के दबाव से सटीक आंकड़े जुटाती है।

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हम्पटा क्षेत्र में 37 फीसदी अधिक मिली बर्फ

सेंसर से मिले नए आंकड़ों से पता चला कि हम्पटा क्षेत्र में पहले के अनुमान से 37 प्रतिशत ज्यादा बर्फबारी हुई थी। इस डेटा को मौसम मॉडल में शामिल करने के बाद पूर्वानुमान काफी सटीक हो गया है। अब बर्फबारी के समय और स्थान की सही जानकारी मिल सकेगी।

जल संकट से निपटने में सरकारों को मिलेगी मदद

इस सटीक जानकारी से विभिन्न देशों की सरकारों को जल प्रबंधन करने और खेती की योजनाएं बनाने में आसानी होगी। पानी को जमा करने के लिए कृत्रिम ग्लेशियर और आइस स्तूप जैसी आधुनिक तकनीकों पर भी काम चल रहा है, जिससे गर्मियों में सिंचाई हो सके।

जलवायु परिवर्तन के दौर में बड़ी उपलब्धि

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण पहाड़ों में पानी का संकट गहराता जा रहा है। हिमालय क्षेत्र में लंबे समय के डेटा वाले मौसम केंद्रों की भारी कमी है। ऐसे में जल योजनाओं को सुरक्षित बनाने के लिए यह नई तकनीक मील का पत्थर साबित होगी।

पहाड़ों से वैज्ञानिक का रहा गहरा जुड़ाव

इस महत्वपूर्ण शोध से जुड़े मुख्य वैज्ञानिक का हिमालय से बचपन का एक भावनात्मक रिश्ता रहा है। उन्होंने बताया कि पहाड़ों और प्राकृतिक सुंदरता के प्रति इसी पुराने लगाव ने उन्हें रिसर्च के लिए प्रेरित किया, ताकि भविष्य के जल संकट का हल खोजा जा सके।

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