Bilaspur News: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में समाजसेवा और परोपकार की एक अद्भुत मिसाल सामने आई है। जिला कल्याण अधिकारी रमेश चंद बंसल और उनके पूरे परिवार ने मानवता की भलाई के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। परिवार के छह सदस्यों ने एम्स बिलासपुर में स्वेच्छा से देहदान करने का ऐतिहासिक संकल्प लिया है।
मृत्यु के बाद चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के काम आएगा शरीर
देहदान का यह संकल्प लेने वालों में रमेश चंद बंसल के साथ उनकी माता चैत्रु देवी, पत्नी भीमा, बेटी अंजलि, बेटा आदित्य और उनकी पुत्रवधू अन्नपूर्णा बंसल शामिल हैं। इस शिक्षित परिवार का मानना है कि मृत्यु के बाद उनका नश्वर शरीर चिकित्सा शिक्षा, वैज्ञानिक शोध और पीड़ित मानव सेवा के काम आ सकेगा।
27 वर्षों के सरकारी कार्यकाल के अनुभवों से मिली बड़ी प्रेरणा
रमेश चंद बंसल साल 1998 से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अपने 27 साल के लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने दिव्यांगजन, वृद्धाश्रमों और जरूरतमंद लोगों के बीच काम किया। इस दौरान उन्होंने कई ऐसे गंभीर मरीजों को देखा जो अंग प्रत्यारोपण के इंतजार में दम तोड़ देते थे।
इन मर्मस्पर्शी अनुभवों ने उन्हें अंगदान और देहदान जैसे महादान के वास्तविक महत्व का गहराई से एहसास कराया। उनका मानना है कि समय पर अंग उपलब्ध होने से कई अनमोल जानें बचाई जा सकती हैं। इसके साथ ही मृत्यु के बाद देहदान करने से मेडिकल छात्रों की पढ़ाई को भी एक नई दिशा मिलती है।
राधा स्वामी सत्संग ब्यास से जुड़कर मिला सेवा का विचार
बंसल ने बताया कि वर्ष 2014 में राधा स्वामी सत्संग ब्यास संस्था से जुड़ने के बाद उन्हें परोपकार और निस्वार्थ सेवा की विशेष प्रेरणा मिली। उन्होंने समाज के सभी नागरिकों से अंधविश्वासों से ऊपर उठकर अंगदान और देहदान के प्रति जागरूक होने और मानवता के इस महाअभियान से जुड़ने की अपील की है।

