Himachal Pradesh News: कसौली दुष्कर्म मामले में नया मोड़ आ गया है। निचली अदालत द्वारा केस दोबारा खोलने से इनकार किए जाने के बाद पीड़िता ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रारंभिक सुनवाई में हाई कोर्ट ने मामले का रिकॉर्ड तलब करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
यह मामला हरियाणा भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और गायक राकी मित्तल से जुड़ा है। शिकायतकर्ता महिला ने दोनों पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए पीड़िता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर सुनवाई शुरू हो चुकी है।
हाई कोर्ट ने मांगा पूरा रिकॉर्ड
प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कसौली कोर्ट से केस से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार को भी नोटिस जारी किया गया है। अब मामले की अगली सुनवाई में निचली अदालत की कार्यवाही और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी।
शिकायतकर्ता महिला दिल्ली की रहने वाली बताई गई है और सोनीपत में नौकरी करती है। महिला ने आरोप लगाया था कि जुलाई 2023 में कसौली के एक होटल में उसके साथ दुष्कर्म हुआ। हालांकि आरोपित मोहन लाल बड़ौली पहले ही इन आरोपों को निराधार और तथ्यहीन बता चुके हैं।
क्या हैं महिला के आरोप?
महिला ने 13 दिसंबर 2024 को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में कहा गया कि वह अपनी सहेली और बॉस के साथ कसौली घूमने आई थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात मोहन लाल बड़ौली और गायक राकी मित्तल से हुई। बाद में उसे होटल के कमरे में बुलाया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे नौकरी और मॉडल बनाने का झांसा दिया गया। इसके बाद उसके साथ जबरन शराब पिलाकर दुष्कर्म किया गया। यह शिकायत कथित घटना के करीब डेढ़ वर्ष बाद दर्ज करवाई गई थी, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी।
साक्ष्य न मिलने पर बंद हुआ था मामला
जांच के दौरान पुलिस को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इसके बाद पुलिस ने अदालत में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल कर दी। कसौली कोर्ट ने शिकायतकर्ता के लगातार दो बार पेश न होने पर मामले को बंद कर दिया था। बाद में पीड़िता ने जिला एवं सत्र न्यायालय सोलन में इस फैसले को चुनौती दी।
जिला अदालत ने मामले को दोबारा कसौली कोर्ट भेजा था। इसके बाद पीड़िता ने क्लोजर रिपोर्ट रद्द करने और केस फिर से खोलने की मांग की। हालांकि कसौली कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए याचिका खारिज कर दी। अब पूरा मामला हाई कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है।
Author: Adv Anuradha Rajput

