Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम के धर्मशाला डिपो से लापरवाही का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां तैनात अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण एक चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी से उसकी सेवानिवृत्ति की तारीख के बाद भी दो महीने तक अतिरिक्त काम करवा लिया गया।
प्रशासनिक सुस्ती से पूरे परिवहन निगम में मचा भारी हड़कंप
धर्मशाला डिपो के प्रशासनिक अमले को अपने ही स्टाफ की रिटायरमेंट की सही तारीख याद नहीं रही। जब दफ्तर के भीतर इस बड़ी प्रशासनिक चूक का खुलासा हुआ, तो वहां हड़कंप मच गया। खुद को फंसता देख अधिकारियों ने आनन-फानन में महिला कर्मी को चुपचाप तरीके से सेवामुक्त कर दिया।
बसों का टाइम टेबल संभालने वाला स्टाफ खुद तारीख भूला
इस अजीबोगरीब घटना के बाद से एचआरटीसी का यह दफ्तर पूरे राज्य में हंसी का पात्र बना हुआ है। कर्मचारी यूनियनों और आम जनता के बीच यह मामला चर्चा का मुख्य विषय है। लोग कह रहे हैं कि जो विभाग बसों के टाइम टेबल को लेकर सख्त रहता है, वह कर्मचारी की सेवानिवृत्ति भूल गया।
ऑफिस रिकॉर्ड की रूटीन जांच में खुली लापरवाही की पोल
इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब हाल ही में कार्यालय के रिकॉर्ड की रूटीन जांच की गई। जैसे ही यह बात सामने आई कि महिला कर्मचारी दो महीने पहले ही तकनीकी रूप से रिटायर हो चुकी है, तो अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। इसके बाद उन्होंने मामले को दबाना शुरू किया।
बिना किसी औपचारिक विदाई के चुपचाप कर्मचारी को भेजा घर
अपनी गर्दन फंसती देख धर्मशाला डिपो प्रबंधन ने इस बड़ी गलती को सुधारने के बजाय पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की। इसके बाद उक्त महिला कर्मचारी को बिना किसी औपचारिक विदाई समारोह या बिना किसी शोर-शराबे के दो महीने बाद चुपचाप तरीके से रिटायर्ड कर घर भेज दिया गया।
फरवरी में होना था रिटायर लेकिन अप्रैल तक की नौकरी
जानकारी के अनुसार, धर्मशाला डिपो में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी दर्शना देवी को नियमों के मुताबिक फरवरी 2026 में सेवानिवृत्त होना था। इसके बावजूद मार्च और अप्रैल महीने में भी महिला कर्मचारी रोज की तरह दफ्तर आती रही और अधिकारियों की नाक के नीचे पूरी निष्ठा से ड्यूटी देती रही।
इस पूरे घटनाक्रम ने हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम के मैनेजमेंट और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल इस गंभीर मामले में उच्च अधिकारियों की ओर से किसी बड़ी कार्रवाई या जांच के आदेश की बात सामने नहीं आई है, लेकिन इससे निगम की साख प्रभावित हुई है।
Author: Sunita Gupta


