दुष्कर्म, ब्लैकमेल और खौफनाक साजिश: जिम ट्रेनर महिला को हाईकोर्ट से झटका, अब ऊना कोर्ट में ही चलेगा मुकदमा

Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ब्लैकमेल और आपराधिक साजिश के एक गंभीर मामले में आरोपी महिला को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने ऊना की निचली अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों को बरकरार रखते हुए आरोपी की पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसका ट्रायल ऊना की अदालत में ही चलता रहेगा। इस फैसले से आरोपी महिला की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं।

जिम ट्रेनर पर आपराधिक साजिश में शामिल होने का आरोप

यह पूरा मामला साल 2020 का है, जब ऊना जिले के चिंतपूर्णी थाने में एक संगीन एफआईआर दर्ज हुई थी। मुख्य आरोपी नरेंद्र कुमार पर एक महिला के साथ दुष्कर्म करने और उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल करने की धमकी देने का आरोप है। जांच में सामने आया कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र में जिम ट्रेनर कुलजीत कौर उर्फ शालू ने इस पूरी साजिश में नरेंद्र का साथ दिया। पीड़िता ने अपने बयान में कुलजीत कौर की भूमिका का भी स्पष्ट तौर पर जिक्र किया है।

अधिकार क्षेत्र की दलील को हाईकोर्ट ने किया दरकिनार

याचिकाकर्ता कुलजीत कौर ने अदालत में तर्क दिया था कि कथित अपराध हरियाणा के कुरुक्षेत्र में हुआ है। इस आधार पर उन्होंने हिमाचल की अदालत के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी थी। हालांकि, न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने इस दलील को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ब्लैकमेल के जरिए वसूली गई रकम हिमाचल प्रदेश में प्राप्त हुई थी। कानून के अनुसार, जब अपराध की कड़ियां कई राज्यों से जुड़ी हों, तो किसी भी संबंधित स्थान की अदालत सुनवाई कर सकती है।

बैंक लेन-देन और पीड़िता के बयान बने अहम आधार

हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत फैसले में रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों को बेहद महत्वपूर्ण माना है। अदालत ने कहा कि पीड़िता के बयान और बैंक लेन-देन के रिकॉर्ड प्रथम दृष्टया आपराधिक साजिश की ओर इशारा करते हैं। रिकॉर्ड से स्पष्ट होता है कि ब्लैकमेल और धन उगाही का हिस्सा सीधे तौर पर हिमाचल प्रदेश से जुड़ा हुआ है। इसी आधार पर ऊना की निचली अदालत को इस केस की सुनवाई करने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया।

सख्त धाराओं के तहत ऊना कोर्ट में जारी रहेगा ट्रायल

निचली अदालत ने आरोपी कुलजीत कौर के खिलाफ आईपीसी की धारा 120-बी, 384 और 506 के तहत आरोप तय किए थे। हाईकोर्ट ने इन आरोपों में हस्तक्षेप करने की किसी भी आवश्यकता से इनकार किया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अपराध कई चरणों में और अलग-अलग स्थानों पर अंजाम दिया गया है। अब इस संवेदनशील मामले का ट्रायल ऊना की अदालत में अपनी रफ्तार से चलेगा। इस फैसले ने ब्लैकमेलिंग जैसे अपराधों के खिलाफ कानून की सख्ती को फिर से दोहराया है।

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