Ambala News: केंद्रीय कारागार (सेंट्रल जेल) में कैदियों को नशा सप्लाई करने वाले जेल कर्मी का भंडाफोड़ हुआ है। जेल प्रशासन की आंतरिक जांच में इस बड़ी संलिप्तता का खुलासा हुआ है। इसके बाद बलदेव नगर थाना पुलिस ने आरोपी वार्डर और तीन बंदियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
बैरक में तलाशी के दौरान बंदी की जेब से बरामद हुई अफीम
जेल की उप अधीक्षक गीता रानी की शिकायत पर वार्डर रविंद्र, बंदी सुखजीत, प्रकाश और विरेंद्र लांबा के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। यह कड़ी कार्रवाई एनडीपीएस एक्ट और प्रिजनर एक्ट के तहत की गई है। जेल अधीक्षक सतविंद्र गोदारा ने बताया कि पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
जेल के बुर्ज नंबर पांच से बैरक के भीतर फेंका गया था नशा
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार 27 जून को ब्लॉक नंबर 5 के कमरा नंबर एक में नशीला पदार्थ होने की गुप्त सूचना मिली थी। संदेह के आधार पर जब बंदी सुखजीत सिंह की तलाशी ली गई, तो उसकी लोअर की जेब से अफीम बरामद हुई। इसके बाद जेल प्रशासन तुरंत चौकन्ना हो गया।
अस्पताल से दवाई लेने के बहाने कैदियों ने रची थी पूरी साजिश
पूछताछ में सामने आया कि यह अफीम 19 जून को ड्यूटी पर तैनात जेल वार्डर रविंद्र ने बुर्ज नंबर पांच से भीतर फेंकी थी। इसे उठाने के लिए बंदी प्रकाश का इस्तेमाल किया गया। प्रकाश दवाई लेने के बहाने जेल अस्पताल गया था और वहां से अफीम उठाकर सुखजीत तक पहुंचाई थी।
बंदी की वीडियो कॉल की जांच से खुली आरोपी वार्डर की पोल
प्राथमिकी के अनुसार आरोपी वार्डर रविंद्र की भूमिका की पुष्टि बंदी द्वारा घर पर की गई एक वीडियो कॉल की जांच से हुई है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर नशीले पदार्थ को सील कर दिया। इसके बाद जेल प्रशासन ने पूरी बैरक में बड़ा तलाशी अभियान चलाया।
सेंट्रल जेल में पहले भी मिल चुके हैं मोबाइल और नशीले पदार्थ
अंबाला सेंट्रल जेल में पहले भी कई बार बंदियों से नशा और मोबाइल फोन बरामद हो चुके हैं। यहां तक कि कई बार बंदी सुरक्षा कर्मचारियों को चकमा देकर फरार भी हो चुके हैं। जेल प्रशासन की इस ढिलाई पर बार-बार सवाल उठते हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है।

