Delhi News: अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य से मालवाहक जहाजों की सामान्य आवाजाही जल्द शुरू होने वाली है। वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस समुद्री रास्ते के खुलने से भारतीय अर्थव्यवस्था को एक बहुत बड़ा बूस्ट मिलने की पूरी उम्मीद है।
इस व्यापारिक मार्ग के पूरी तरह सक्रिय होने से देश के एक सौ चालीस करोड़ नागरिकों पर बहुत ही सकारात्मक आर्थिक प्रभाव पड़ेगा। वास्तव में दुनिया भर में होने वाली तेल और गैस की कुल सप्लाई का लगभग बीस प्रतिशत हिस्सा अकेले होर्मुज़ जलडमरूमध्य मार्ग के माध्यम से ही पूरा किया जाता है।
भारतीय तेल और गैस आयात के लिए बेहद खास है यह समुद्री रास्ता
भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर बहुत अधिक निर्भर रहता है। देश अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग पचास प्रतिशत हिस्सा केवल इसी रास्ते से मंगवाता है। इसके अलावा देश में आने वाली सत्तर प्रतिशत एलपीजी और करीब नब्बे प्रतिशत एलएनजी इसी मार्ग से आती थी।
इस खाड़ी मार्ग के दोबारा पूरी तरह खुलने से भारत को अपनी तेल और गैस की घरेलू सप्लाई सुनिश्चित करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी। ईरान और अमेरिका के बीच हुई इस नई डील से वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आने की पूरी संभावना बन गई है।
ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंध हटने से देश को होगा तिगुना फायदा
इस अंतरराष्ट्रीय समझौते के बाद पश्चिमी देशों द्वारा ईरान पर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाए जाने की बड़ी उम्मीद है। साल दो हजार अठारह में पाबंदियां सख्त होने से पहले भारत के कुल तेल आयात में अकेले ईरान की हिस्सेदारी करीब साढ़े ग्यारह प्रतिशत तक पहुंच गई थी।
उस समय ईरानी सरकार भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को तेल खरीदने के लिए कच्चे तेल की कीमतों और शिपिंग लागत में भारी छूट देती थी। साथ ही भुगतान के लिए ज्यादा समय जैसे कई आकर्षक ऑफर भी मिलते थे। प्रतिबंध हटने से अब भारतीय तेल कंपनियों को सीधा वित्तीय फायदा होगा।
रूस और सऊदी अरब के अलावा मिलेगा एक और बड़ा तेल सप्लायर
ईरान के मुख्यधारा में वापस आने से भारत को रूस, सऊदी अरब और इराक के अलावा एक और बहुत बड़ा तेल सप्लायर मिल जाएगा। इससे भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को लेकर अन्य उत्पादक देशों से मनमुताबिक मोलभाव करने में काफी आसानी होगी।
इसके साथ ही पिछले कुछ समय से रूस के कच्चे तेल पर भारत की बढ़ती निर्भरता भी काफी हद तक कम हो जाएगी। तेल के अलावा कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट के मामले में भी भारतीय रणनीतिक हितों को बहुत बड़ा फायदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
सामरिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह पर भारत को मिलेगा पूरा कंट्रोल
अमेरिकी प्रतिबंधों के कड़े दबाव की वजह से भारत ने कुछ समय पहले चाबहार बंदरगाह का संचालन एक ईरानी स्थानीय कंपनी को सौंप दिया था। लेकिन अब प्रतिबंध हटने के बाद भारतीय कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड इस रणनीतिक बंदरगाह का पूरा कंट्रोल वापस अपने हाथों में ले सकेगी।
यह बंदरगाह भारत को हिंद महासागर तक सीधी और सुरक्षित पहुंच देता है। इसका मतलब है कि मध्य एशिया, अफगानिस्तान और रूस तक भारत की व्यापारिक कनेक्टिविटी मजबूत होगी। भारत अब पाकिस्तान पर निर्भर हुए बिना इन सभी महत्वपूर्ण देशों के साथ अपना सीधा व्यापार बढ़ा सकेगा।
भारतीय निर्यातकों के लिए दोबारा खुलेगा ईरान का बड़ा बाजार
इस अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक बदलाव से भारतीय निर्यातकों को व्यापार के लिए एक नया और बहुत बड़ा विदेशी बाजार आसानी से मिल जाएगा। भारत मुख्य रूप से ईरान को बासमती चावल, चाय पत्ती, जीवन रक्षक दवाएं, विभिन्न केमिकल्स और बेहतरीन इंजीनियरिंग सामानों का भारी निर्यात करता रहा है।
साल दो हजार अठारह-उन्नीस में भारत का ईरान को कुल निर्यात करीब चार अरब डॉलर के उच्च स्तर पर था, जो प्रतिबंधों के बाद लगातार घटता चला गया। अब इन पाबंदियों के हटने पर भारतीय व्यापारियों के लिए ईरान दोबारा से मुनाफे का एक बहुत बड़ा बाजार बन सकता है।
परिवहन लागत घटने से आम जनता को मिलेगी बढ़ती महंगाई से राहत
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने से भारत में कच्चे तेल और रसोई गैस की घरेलू सप्लाई तेजी से बढ़ेगी। देश में इन दोनों ही जरूरी ईंधनों के दाम में अच्छी खासी कमी आ सकेगी, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ कम होगा।
ईंधन की कीमतें कम होने पर देश में माल ढुलाई और कुल परिवहन लागत में बड़ी गिरावट दर्ज की जाएगी। इसका सीधा सकारात्मक असर पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था के हर छोटे-बड़े सेक्टर पर पड़ेगा, जिससे देश के आम लोगों को बढ़ती महंगाई से बहुत बड़ी राहत मिल सकेगी।
Author: Rajesh Kumar


