Chemist Strike: ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के खिलाफ देशभर में आज बंद रहेंगे मेडिकल स्टोर, मरीजों की बढ़ सकती है मुश्किल

Delhi News: ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने आज देशव्यापी हड़ताल का बड़ा एलान किया है। ऑनलाइन दवाओं की अवैध बिक्री और नियमों के उल्लंघन के विरोध में देशभर के मेडिकल स्टोर आज 24 घंटे के लिए पूरी तरह बंद रहेंगे।

दवा विक्रेताओं के इस देशव्यापी बंद की वजह से मरीजों की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं। हालांकि एसोसिएशन ने अस्पताल और आपातकालीन सेवाओं के लिए जरूरी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर विशेष इंतजाम किए गए हैं।

एसोसिएशन ने इस देशव्यापी बंद में देश के करीब 12.5 लाख दवा विक्रेताओं के शामिल होने का दावा किया है। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के दवा संगठनों ने इस हड़ताल को अपना पूरा समर्थन दिया है। खुदरा व्यापारी सुबह से ही दुकानें बंद रख रहे हैं।

ऑनलाइन दवा बिक्री पर तुरंत रोक लगाने की मांग

दरअसल AIOCD ने ऑनलाइन दवा बेचने वाली कंपनियों की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि ई-फार्मेसी से उनका पारंपरिक कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। दवा विक्रेताओं ने सरकार से ऑनलाइन बिक्री पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।

संगठन ने सरकार से मांग की है कि इस कारोबार के लिए एक स्पष्ट और कड़ा कानून बनाया जाए। एआईओसीडी के अध्यक्ष जगन्नाथ शिंदे ने कहा कि 20 मई 2026 को बुलाई गई यह हड़ताल नीतिगत कमियों के खिलाफ हमारे हक की लड़ाई है।

जगन्नाथ शिंदे ने आरोप लगाया कि वर्तमान ऑनलाइन दवा वितरण प्रणाली कई सरकारी नियमों को ताक पर रखकर काम कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से जीएसआर 817 अधिसूचना का हवाला दिया। संगठन इस अधिसूचना को शुरू से ही अनुचित और जनविरोधी मानता है।

नकली दवाओं के प्रसार और माफिया का खतरा बढ़ा

शिंदे के मुताबिक ऑनलाइन प्रणाली से देश में दवा माफिया को सीधा बढ़ावा मिल रहा है। इससे बाजार में नकली या खराब गुणवत्ता वाली दवाओं के प्रसार का खतरा काफी बढ़ गया है। यह स्थिति आम जनता के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।

वर्तमान में देश का दवा व्यवसाय साल 1940 के ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और 1945 के नियमों के तहत चलता है। इस पुराने कानून में ऑनलाइन बिक्री को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं। सरकार ने साल 2018 में एक अधिसूचना जारी की थी।

सरकार ने उस अधिसूचना को आज तक कानूनी रूप से पूरी तरह लागू नहीं किया है। इस मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश भी जारी किए थे।

कोरोना काल के बाद कड़े मुकाबले में फंसे छोटे कारोबारी

सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान साल 2020 में दवाओं की होम डिलीवरी की विशेष अनुमति दी थी। महामारी खत्म होने के बाद भी यह व्यवस्था चलती रही। इसके बाद बड़े कॉरपोरेट घरानों ने भारी निवेश कर बाजार पर कब्जा कर लिया।

बड़ी कंपनियां भारी छूट देकर बाजार की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रही हैं। इससे 12.5 लाख छोटे दवा विक्रेताओं के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण इलाकों में इससे पारंपरिक दवा वितरण ढांचा पूरी तरह चरमरा जाएगा।

एसोसिएशन ने मांग की है कि केमिस्ट को डॉक्टर के पर्चे वाली दवा के समान अन्य ब्रांड की सस्ती दवा देने का अधिकार मिले। सरकार को कई बार ज्ञापन सौंपने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से आज देशव्यापी बंद का फैसला लिया गया।

Author: Rajesh Kumar

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