हिमाचल प्रदेश: सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता सुधारने के लिए टीमों का गठन, गड़बड़ी पर होगी सख्त कार्रवाई

Solan News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्रों को परोसे जाने वाले दोपहर के भोजन की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्कूलों के औचक निरीक्षण के लिए विशेष टीमों का गठन किया है। भोजन की गुणवत्ता खराब मिलने पर स्कूलों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

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निरीक्षण के दौरान अधिकारी भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, निर्धारित मेन्यू और रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करेंगे। प्रत्येक निरीक्षण के सात दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट, फोटो और सुधारात्मक सुझावों के साथ कार्यालय में जमा करानी होगी। व्यवस्था में लापरवाही या वित्तीय अनियमितता मिलने पर उच्च अधिकारियों को तुरंत सूचित किया जाएगा।

दीवार पर लिखे मेन्यू के अनुसार बनेगा भोजन

शिक्षा विभाग ने उप गुणवत्ता निदेशक को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। जांच टीमों को स्कूल की रसोई, भंडार कक्ष और बर्तनों की स्वच्छता देखने को कहा गया है। भोजन बनाने वाले कुक-कम-हेल्पर की व्यक्तिगत साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि स्कूल की दीवार पर लिखे मेन्यू के आधार पर ही भोजन तैयार कर परोसा जाए। निरीक्षण दल के सदस्य खुद भोजन का स्वाद चखकर उसकी गुणवत्ता की पुष्टि करेंगे। इसके अलावा मातृ भोजन परख रजिस्टर और एमडीएम स्टॉक रजिस्टर की भी गहनता से जांच की जाएगी।

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अधूरे आधार पंजीकरण के लिए लगेंगे शिविर

निरीक्षण के दौरान छात्रों की उपस्थिति और आधार नामांकन से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। जिन विद्यार्थियों का आधार पंजीकरण नहीं हुआ है, उनके लिए स्कूल स्तर पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इससे योजना में पारदर्शिता आएगी और सभी बच्चों का रिकॉर्ड दुरुस्त रहेगा।

टीम मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना के तहत उबले अंडे या ताजे फलों के वितरण की स्थिति भी देखेगी। कुक-कम-हेल्पर के मानदेय का समय पर भुगतान और योजना के बजट के सही इस्तेमाल की समीक्षा होगी। जिला सोलन के स्कूल शिक्षा उपनिदेशक (गुणवत्ता) डॉ. राजेंद्र वर्मा ने इसकी पुष्टि की है।

डॉ. राजेंद्र वर्मा ने बताया कि सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण योजना की नियमित निगरानी की जा रही है। विद्यार्थियों को साफ, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन देना हमारी प्राथमिकता है। समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है और लापरवाही सामने आने पर संबंधित स्कूल को तुरंत सुधार के निर्देश दिए जाते हैं।

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