Delhi News: उद्योगपति गौतम अडानी समूह की सीमेंट कंपनियों में शुमार सांघी इंडस्ट्रीज इन दिनों शेयर बाजार में भारी चर्चा का विषय बनी हुई है। कंपनी के शेयरों की कीमत बेहद कम होने के कारण खुदरा निवेशक इसमें काफी दिलचस्पी दिखाते हैं। हालांकि बीते कुछ कारोबारी सत्रों से इस शेयर में ट्रेडिंग पूरी तरह ठप पड़ी है।
सांघी इंडस्ट्रीज के शेयरों की ट्रेडिंग अचानक रुकने से निवेशकों में काफी घबराहट का माहौल देखा जा रहा है। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक इस निलंबन के पीछे तकनीकी और प्रक्रियात्मक कारण शामिल हैं। कंपनी के भविष्य और इसकी वित्तीय स्थिति को लेकर भी बाजार में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
बीएसई पर ट्रेडिंग सस्पेंड होने से निवेशक हैरान
शेयर बाजार में सांघी इंडस्ट्रीज के शेयर की आखिरी कीमत 50 रुपये के स्तर पर रिकॉर्ड की गई थी। इसके बाद से ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की वेबसाइट पर इस शेयर के आगे ‘ट्रेडिंग सस्पेंडेड’ का मैसेज दिखाई दे रहा है। एक्सचेंज ने साफ किया है कि कुछ प्रक्रियात्मक कारणों से ट्रेडिंग रोकी गई है।
याद दिला दें कि साल 2023 में अडानी समूह की प्रमुख सीमेंट कंपनी अंबुजा सीमेंट्स ने एक बड़े सौदे के तहत सांघी इंडस्ट्रीज का अधिग्रहण किया था। यह पूरा सौदा करीब 5,185 करोड़ रुपये में फाइनल हुआ था। इस अधिग्रहण के बाद से ही कंपनी के मैनेजमेंट और संचालन में कई बड़े बदलाव हुए हैं।
अडानी ग्रुप और पूर्व प्रमोटर के बीच हुआ बड़ा सेटलमेंट
इस बीच कंपनी से जुड़ी एक बड़ी और राहत भरी खबर भी सामने आई है। सांघी इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर आलोक सांघी और अंबुजा सीमेंट के बीच चल रहा पुराना कानूनी विवाद अब पूरी तरह सुलझ गया है। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से अपने मतभेदों को खत्म करने का फैसला किया है।
विवाद खत्म होने के बाद आलोक सांघी ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में दायर अपनी याचिका को वापस ले लिया है। यह पूरा कानूनी विवाद 84 करोड़ रुपये की एक व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा हुआ था। इस समझौते के साथ ही दोनों दिग्गजों के बीच चल रही लंबी अदालती लड़ाई खत्म हो गई है।
अंबुजा सीमेंट्स ने भी बड़ा कदम उठाते हुए 10 अप्रैल, 2026 को अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) में दायर अपनी याचिका वापस ले ली थी। एनसीएलटी ने नवंबर 2025 में आलोक सांघी के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया था, जिसे उन्होंने अपीलीय न्यायाधिकरण में चुनौती दी थी।
बिजली बिल के भुगतान से शुरू हुआ था पूरा विवाद
एनसीएलटी ने इस मामले की जांच के लिए एक अंतरिम समाधान पेशेवर भी नियुक्त किया था। हालांकि पिछले दिनों अपीलीय न्यायाधिकरण को बताया गया कि दोनों पक्षों में समझौता हो चुका है। इसके बाद अंबुजा सीमेंट ने दिवाला संहिता की धारा 95 के तहत अपनी याचिका आधिकारिक रूप से वापस ले ली थी।
अदालत में धारा 99 के तहत समाधान पेशेवर की अंतिम रिपोर्ट अब तक जमा नहीं की जा सकी थी, क्योंकि एनसीएलएटी ने इस पर स्थगन आदेश लगा दिया था। इसके बाद बीते 26 मई को आलोक सांघी की तरफ से याचिका वापसी के अनुरोध को अदालत ने पूरी तरह स्वीकार कर लिया।
आईबीसी कानून के तहत लेनदार किसी भी व्यक्तिगत गारंटर के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। अंबुजा सीमेंट और सांघी के बीच यह विवाद एक बिजली बिल के भुगतान को लेकर शुरू हुआ था। बातचीत से समाधान न निकलने पर अंबुजा ने 84 करोड़ रुपये की पर्सनल गारंटी लागू कर दी थी।
Author: Rajesh Kumar


