Mumbai News: भारतीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को हल्की कमजोरी देखने को मिली है. इसके चलते रुपया लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नीचे बंद हुआ. बाजार में आज पूरे दिन कारोबार अपेक्षाकृत काफी सीमित दायरे में रहा, जिससे निवेशकों की धड़कनें थोड़ी बढ़ी हुई दिखाई दीं.
अब सभी निवेशकों और बड़े मुद्रा कारोबारियों की निगाहें पूरी तरह से शुक्रवार को आने वाली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समीक्षा पर टिकी हुई हैं. गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.7850 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.7050 पर बंद हुआ था.
आयातकों की हेजिंग से बढ़ा रुपये पर दबाव
हालांकि दिनभर रुपये में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया, लेकिन एशियाई देशों की अन्य मुद्राओं में आई कमजोरी और बड़े आयातकों की ओर से बढ़ी हुई हेजिंग गतिविधियों ने रुपये पर लगातार दबाव बनाए रखा है. इसी वजह से बाजार में आज डॉलर के मुकाबले रुपये में यह गिरावट दर्ज की गई.
बता दें कि मई महीने के मध्य में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के रिकॉर्ड निचले स्तर 96.96 तक पहुंच गया था. इसके ठीक बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने हाजिर और अग्रिम मुद्रा बाजार में तुरंत हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को काफी हद तक संभालने की सफल कोशिश की थी.
केंद्रीय बैंक के दखल से मिली थी बड़ी राहत
रिजर्व बैंक के इस समय पर उठाए गए कदम से रुपये को काफी अच्छी राहत मिली और उसमें सुधार देखने को मिला था. केंद्रीय बैंक के इस बड़े हस्तक्षेप का असर केवल एक्सचेंज दर पर ही नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य महत्वपूर्ण संकेतकों पर भी सकारात्मक रूप से पड़ा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि एडवांस एक्सचेंज प्रीमियम में अच्छी कमी आई है, जिससे आयातकों के लिए भविष्य के डॉलर भुगतान को सुरक्षित करना अपेक्षाकृत काफी सस्ता हो गया है. हालांकि इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि निर्यातकों के लिए अग्रिम सुरक्षा लेने की प्रेरणा थोड़ी कम हो सकती है.
विदेशी निवेशकों को लुभाने की बड़ी तैयारी
बाजार में अब यह उम्मीद भी तेजी से बढ़ रही है कि सरकार और केंद्रीय बैंक विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए कुछ अतिरिक्त कदम उठा सकते हैं. खबरों के मुताबिक सरकारी बांड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों के लिए पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax) में बड़ी राहत देने पर विचार हो रहा है.
इसके अलावा अनिवासी भारतीय (NRI) जमा योजनाओं को पहले से अधिक आकर्षक बनाने और विदेशी ऋण जुटाने वाली कंपनियों के लिए हेजिंग लागत कम करने जैसे उपायों की भी चर्चा तेज है. यदि शुक्रवार को रिजर्व बैंक की नीति समीक्षा में रुपये को लेकर ठोस कदम नहीं दिखे, तो दबाव बढ़ सकता है.
ब्याज दरों को लेकर बंटा हुआ है बाजार
ब्याज दरों को लेकर भी बाजार में इस समय अलग-अलग राय बनी हुई है. अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक फिलहाल नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा. हालांकि मुद्रा कारोबारियों का एक वर्ग मानता है कि केंद्रीय बैंक महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए दरें बढ़ा सकता है.
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर भारी दबाव बनाया है. विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में रुपये की दिशा काफी हद तक रिजर्व बैंक के फैसलों, विदेशी निवेश प्रवाह और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर ही पूरी तरह निर्भर करेगी.
Author: Rajesh Kumar


