बाजार से सरसों और रिफाइंड तेल खरीदने वालों के लिए आ गया नया सरकारी नियम, अब कंपनियां नहीं कर पाएंगी खेल!

Delhi News: देश में सरसों, सोयाबीन और पाम ऑयल जैसे खाने के तेल का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने मिलावट और पैकेट के साइज में होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए नया नियम लागू कर दिया है। अब तेल कंपनियां मनमाने साइज में उत्पाद नहीं बेच सकेंगी।

अब केवल नौ तय साइज में ही मिलेगी खाद्य तेल की बोतल

रॉयटर्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, नए नियम के तहत अब खाने के तेल की बिक्री केवल नौ तय स्टैंडर्ड साइज के पैक में ही की जा सकती है। सरकार का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को असमंजस से बचाना है। इससे बाजार में अलग-अलग ब्रांडों के तेल की कीमतों की सटीक तुलना करना बेहद आसान हो जाएगा।

नए नियमों के मुताबिक खाने के तेल की पैकेजिंग को अब दो सौ मिलीलीटर से लेकर सीधे बीस लीटर तक के नौ मानक आकारों में सीमित किया गया है। मौजूदा वक्त में कंपनियां अजीबोगरीब साइज के पैकेट बाजार में उतार देती हैं। इससे आम उपभोक्ताओं के लिए तेल की सही कीमत का अंदाजा लगाना नामुमकिन हो जाता है।

विदेशी और घरेलू दोनों तरह के तेलों पर कड़ा नियम

यह नया नियम देश के भीतर तैयार होने वाले और विदेशों से आयात किए जाने वाले सभी प्रमुख खाद्य तेलों पर समान रूप से लागू होगा। इसमें मुख्य रूप से पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल, सूरजमुखी तेल, सरसों तेल और मूंगफली तेल शामिल हैं। सरकार ने इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने के लिए तीन महीने का वक्त दिया है।

इस मियाद के खत्म होने के बाद सभी कंपनियों को अनिवार्य रूप से निर्धारित पैक साइज में ही तेल बेचना होगा। इसके अलावा कंपनियों के लिए एक और कड़ा नियम बनाया गया है। अब पैकेट पर तेल की मात्रा यानी वॉल्यूम के साथ-साथ उसके बराबर वजन की सटीक जानकारी देना भी बेहद जरूरी होगा।

गरीब उपभोक्ताओं के लिए छोटे पैकेट को मिली बड़ी राहत

सरकार ने बाजार के इस नए नियम में कम आय वाले गरीब उपभोक्ताओं की जरूरतों का भी पूरा ख्याल रखा है। ग्रामीण इलाकों में बिकने वाले दो सौ मिलीलीटर से कम क्षमता वाले छोटे और सस्ते पाउच को इस नियम से बाहर रखा गया है। इसके अलावा कुछ विशेष श्रेणी के चुनिंदा तेलों को भी छूट मिली है।

उपभोक्ता मामलों के विभाग ने साफ किया है कि यह ऐतिहासिक फैसला देश के एडिबल ऑयल सेक्टर की लगभग नब्बे प्रतिशत कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों से चर्चा के बाद लिया गया है। इस कदम से खाने के तेल के बाजार में पारदर्शिता आएगी और कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगेगी।

Rajesh Kumar

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