New Delhi News: भारत सरकार ने देश में सोने, चांदी और प्लेटिनम के इंपोर्ट पर लगने वाली प्रभावी सीमा शुल्क को बढ़ाकर करीब 15% कर दिया है। यह नया नियम 13 मई 2026 से पूरे देश में लागू हो चुका है। सरकार का मुख्य मकसद बिना जरूरी चीजों के इंपोर्ट को कम करना है।
डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स की मई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने कुल 84 अरब डॉलर का सोना-चांदी बाहर से मंगाया। यह देश के कुल मर्चेंडाइज इंपोर्ट का 10.8% हिस्सा है, यानी भारत का दसवां हिस्सा सिर्फ इन कीमती धातुओं पर ही खर्च हो रहा है।
जानिए सरकार ने अचानक क्यों उठाया यह सख्त कदम
अप्रैल 2026 में सोने-चांदी की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद भारत में इनकी खरीदारी बहुत तेजी से बढ़ी। अप्रैल के महीने में सालाना आधार पर सोने का इंपोर्ट 81.7% और चांदी का इंपोर्ट रिकॉर्ड 157.2% बढ़ गया। इसी भारी डिमांड के कारण देश का व्यापार घाटा काफी बढ़ गया था।
इस बढ़ते घाटे को रोकने के लिए सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है। संशोधित ढांचे के तहत सरकार ने दो बड़े बदलाव किए हैं। सोने, चांदी और प्लेटिनम पर बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को 5% से बढ़ाकर सीधे 10% कर दिया गया है। इससे कुल प्रभावी टैक्स अब 15% हो गया है।
चांदी मंगाना अब पहले जितना आसान नहीं होगा
चांदी के अंधाधुंध इंपोर्ट को रोकने के लिए कुछ खास कोड के तहत आने वाली चांदी को ‘फ्री’ कैटगरी से हटा दिया गया है। अब इसे ‘प्रतिबंधित’ कैटगरी में डाल दिया गया है। टैक्स बढ़ने का असर बाजार पर तुरंत और काफी बड़ा दिखने लगा है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, ड्यूटी बढ़ने के बाद देश में सोने की मांग घटकर सिर्फ 7.5 टन रह गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह मांग 25 टन थी। इस फैसले से ज्वैलर्स की बिक्री में करीब 70% की भारी कमी आई है।
Author: Rajesh Kumar

