West Bengal News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है। ED ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के निदेशक और सह-संस्थापक विनेश चंदेल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। चंदेल की गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग और कोयला घोटाले के मामले में हुई है। यह वही कंपनी है जिसके कोलकाता दफ्तर पर इसी साल जनवरी में ED ने छापा मारा था। तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वहां पहुंच गई थीं।
कौन हैं I-PAC के निदेशक विनेश चंदेल?
विनेश चंदेल राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। प्रशांत किशोर, प्रतीक जैन और ऋषिराज सिंह के साथ मिलकर उन्होंने इस कंपनी की नींव रखी थी। चंदेल कंपनी के रणनीतिक संचालन का बहुत अहम हिस्सा हैं। वह पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनाव अभियान के प्रबंधन में बेहद खास भूमिका निभा रहे थे। चुनाव से ऐन पहले उनकी गिरफ्तारी ममता बनर्जी के लिए एक बहुत बड़ा झटका मानी जा रही है।
कोयला घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के क्या हैं आरोप?
ED अधिकारियों के मुताबिक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी PMLA एक्ट के तहत हुई है। उन पर पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित ‘कोयला घोटाले’ से जुड़े होने का गंभीर आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि कोयला चोरी से जुड़ा करोड़ों रुपये का काला धन ‘हवाला’ ऑपरेटरों के जरिए I-PAC के खातों तक पहुंचा था। चुनाव प्रबंधन संभाल रही कंपनी के शीर्ष अधिकारी की गिरफ्तारी से बंगाल की राजनीति में भारी बवाल मचना पूरी तरह तय है।
ED ने दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता में मारे थे छापे
ED ने 2 अप्रैल को दिल्ली में चंदेल के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके साथ ही बेंगलुरु में I-PAC के एक अन्य सह-संस्थापक ऋषि राज सिंह के ठिकानों पर भी छापे पड़े थे। मुंबई में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता विजय नायर के परिसरों को भी खंगाला गया था। इससे पहले 8 जनवरी को ED ने I-PAC के कोलकाता कार्यालय और प्रतीक जैन के आवास पर भी भारी छापेमारी की थी। उस समय ममता बनर्जी वहां पहुंच गई थीं और कुछ फाइलें ले जाने का विवाद भी खड़ा हुआ था।
क्या है पश्चिम बंगाल का करोड़ों का कोयला घोटाला?
यह पूरा मामला CBI की नवंबर 2020 की एक एफआईआर (FIR) पर आधारित है। इसमें पश्चिम बंगाल के आसनसोल और कुनुस्तोरिया क्षेत्रों में स्थित खदानों से करोड़ों रुपये के कोयला चोरी का आरोप है। ED के अनुसार कोयला तस्करी से जुड़े एक हवाला ऑपरेटर ने I-PAC की कंपनी को करोड़ों रुपये के लेनदेन में मदद की थी। एजेंसी का दावा है कि करीब 20 करोड़ रुपये मुंबई की एक अंगड़िया फर्म के जरिए I-PAC तक पहुंचाए गए थे।


