World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद कड़ा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने ऐलान किया है कि अब अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा करेगी। ट्रंप ने सीधे तौर पर चेतावनी दी है। जो भी जहाज ईरान को टोल देकर इस रास्ते से गुजरेगा, उसे समंदर में डुबो दिया जाएगा। इस बड़ी धमकी के बाद समंदर में तनाव काफी बढ़ गया है। होर्मुज की ओर जा रहे दो पाकिस्तानी तेल टैंकर डर के कारण वापस लौट गए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। दुनिया का बहुत बड़ा तेल व्यापार इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। इस इलाके पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच हमेशा भारी टकराव रहता है। ईरान इस इलाके से गुजरने वाले जहाजों से लगातार टोल वसूलना चाहता है। अमेरिका ईरान की इस कोशिश को पूरी तरह से रोकना चाहता है। इसी वजह से ट्रंप ने यह बहुत सख्त चेतावनी जारी की है।
विशेषज्ञों ने ट्रंप की धमकी को खोखला बताया
ट्रंप के इस कड़े दावे पर कई समुद्री विशेषज्ञों ने बड़े सवाल उठाए हैं। जहाजरानी विशेषज्ञ लार्स जेन्सेन ने इसे महज एक गीदड़ भभकी करार दिया है। जेन्सेन ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि इस नाकाबंदी का असर बहुत कम होगा। अमेरिका के लिए यह तय करना लगभग असंभव है कि किस जहाज ने ईरान को टोल दिया है और किसने नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार इस धमकी से जमीनी स्तर पर वास्तव में कुछ खास फर्क नहीं पड़ने वाला है।
अमेरिकी प्रतिबंधों का पहले से ही भारी दबाव
वेस्पुची मैरीटाइम के सीईओ जेन्सेन ने इस मामले पर एक और अहम बात कही। अमेरिका ने ईरान पर पहले से ही बहुत कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं। ऐसी कोई शिपिंग कंपनी नहीं बची है जो खुलकर ईरान से व्यापार करती हो। अगर कोई भी विदेशी जहाज ईरान को एक डॉलर भी देता है, तो वह सीधे अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में आ जाएगा। अमेरिकी कार्रवाई के डर से कोई भी अंतरराष्ट्रीय कंपनी ईरान के साथ डील बिल्कुल नहीं करना चाहेगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही घटी
मैरीटाइम कंपनियों की ताजा रिपोर्ट्स हैरान करने वाले आंकड़े पेश कर रही हैं। मार्च से अब तक इस रास्ते से सिर्फ डेढ़ सौ से एक सौ अस्सी जहाज ही गुजरे हैं। इसका मतलब है कि रोजाना औसतन पांच या छह जहाज ही यहां से निकल पा रहे हैं। पहले इस अहम रास्ते से हर दिन सौ से ज्यादा जहाज गुजरा करते थे। इस समुद्री मार्ग के व्यापारिक ट्रैफिक में लगभग पचानवे फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीय जहाजों पर इस तनाव का क्या होगा असर
वर्तमान में इस रास्ते से गुजरने वाले अधिकतर जहाज भारत के हैं। ईरान भारत को अपना एक बहुत करीबी दोस्त और सहयोगी मानता है। ईरानी नौसेना भारतीय जहाजों से कोई टोल वसूली नहीं कर रही है। अमेरिका सिर्फ टोल देने वाले जहाजों को निशाना बनाने की बात कह रहा है। इसलिए भारत के जहाज इस अमेरिकी धमकी के सीधे निशाने पर बिल्कुल नहीं आएंगे। हालांकि इस समुद्री इलाके में सुरक्षा का गंभीर खतरा लगातार बना ही रहेगा।
शिपिंग कंपनियों को शांति समझौते का इंतजार
अधिकतर शिपिंग कंपनियां अभी सिर्फ सही समय का इंतजार कर रही हैं। वे देखना चाहती हैं कि क्या दोनों देशों के बीच कोई शांति समझौता होता है। व्यापार के लिए सबसे जरूरी चीज समंदर में सुरक्षा और आपसी भरोसा है। जब तक कंपनियों को पूर्ण सुरक्षा का पक्का भरोसा नहीं मिलता, वे अपने जहाज नहीं भेजेंगी। यह बताना मुश्किल है कि यह समुद्री मार्ग कब सुरक्षित होगा। शांति कायम होने के बाद ही व्यापार धीरे-धीरे अपनी पटरी पर वापस लौटेगा।
पाकिस्तानी तेल टैंकरों की वापसी और डर का माहौल
डोनाल्ड ट्रंप के कड़े बयान का असर पूरे इलाके में साफ दिखने लगा है। अमेरिकी नौसेना की सख्त गश्त से वहां खौफ का भारी माहौल बन गया है। इसी डर के कारण होर्मुज की ओर जा रहे दो पाकिस्तानी तेल टैंकर वापस लौट गए हैं। इससे पता चलता है कि व्यापार से जुड़े लोग कोई जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। समंदर में बढ़ते तनाव के कारण कई देशों के मालवाहक जहाज भी अपना रास्ता लगातार बदल रहे हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता बड़ा खतरा
समुद्री जहाजों की आवाजाही रुकने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर बुरा असर पड़ सकता है। अगर यह विवाद लंबा खिंचता है, तो पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। अमेरिका और ईरान के बीच इस सैन्य टकराव का खामियाजा गरीब देशों को भुगतना पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से शांति बनाए रखने की लगातार अपील कर रहा है। फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य में अनिश्चितता के गहरे बादल छाए हुए हैं और हर किसी की नजर वहां टिकी है।


