मछुआरों के लिए सुक्खू सरकार का मास्टरस्ट्रोक! खाते में सीधे आएंगे पैसे, रॉयल्टी में भी भारी छूट

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने राज्य के मछुआरों को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने जलाशयों से पकड़ी जाने वाली मछलियों के लिए सौ रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय कर दिया है। इस अहम फैसले से मछुआरों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से पूरी सुरक्षा मिलेगी। इसके साथ ही उनकी आमदनी भी तय हो जाएगी। मछुआरों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए यह एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

डीबीटी के जरिए मिलेगी डायरेक्ट सब्सिडी

सरकार ने मछुआरों के हित में एक और अहम घोषणा की है। अगर नीलामी के दौरान मछली की कीमत सौ रुपये प्रति किलोग्राम से कम रहती है, तो सरकार मदद करेगी। ऐसे हालात में राज्य सरकार सीधे मछुआरों के बैंक खातों में सब्सिडी भेजेगी। यह सब्सिडी बीस रुपये प्रति किलोग्राम तक हो सकती है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के इस्तेमाल से इस प्रक्रिया में पूरी तरह से पारदर्शिता आएगी। असली हकदारों को उनकी मेहनत का पूरा पैसा समय पर मिल सकेगा।

रॉयल्टी घटाकर सिर्फ एक प्रतिशत की

मुख्यमंत्री सुक्खू ने मछुआरों पर से आर्थिक बोझ कम करने के लिए रॉयल्टी दर में भी बड़ी कटौती की है। राज्य सरकार ने पहले ही इस दर को पंद्रह प्रतिशत से घटाकर साढ़े सात प्रतिशत कर दिया था। अब चालू वित्त वर्ष के लिए इस दर को और कम करके केवल एक प्रतिशत कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले से राज्य के छह हजार से अधिक मछुआरों को सीधा फायदा पहुंचेगा। इससे उनकी शुद्ध आय में काफी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

हिमाचल के पांच प्रमुख जलाशयों पर फोकस

हिमाचल प्रदेश में मछली पालन मुख्य रूप से पांच बड़े जलाशयों पर निर्भर करता है। इनमें बिलासपुर और ऊना का गोविंद सागर, कांगड़ा का पोंग बांध शामिल है। इसके अलावा चंबा जिले के रणजीत सागर और चमेरा, और बिलासपुर के कोल बांध में भी बड़े पैमाने पर मछली पकड़ी जाती है। सरकार इन सभी जलाशयों में मछली उत्पादन बढ़ाने पर लगातार काम कर रही है। यहां मछुआरों की सुविधा के लिए नए बुनियादी ढांचे का विकास भी तेजी से किया जा रहा है।

जलाशयों में पाई जाने वाली मछलियों की प्रजातियां

राज्य के अलग-अलग जलाशयों में कई तरह की मछलियां भारी मात्रा में पाई जाती हैं। गोविंद सागर, कोल बांध, रणजीत सागर और चमेरा जलाशयों में मुख्य रूप से सिल्वर कार्प मछली मिलती है। वहीं पोंग बांध में सिंघाड़ा मछली का उत्पादन सबसे अधिक होता है। इसके अलावा इन जलाशयों में रोहू, कतला, मृगल, कॉमन कार्प और ग्रास कार्प जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां भी पाई जाती हैं। इन सभी प्रजातियों की बाजार में हमेशा बहुत अच्छी मांग रहती है। इससे मछुआरों को फायदा होता है।

मछली उत्पादन में दर्ज हुई रिकॉर्ड वृद्धि

राज्य सरकार की नीतियों के कारण मछली उत्पादन में शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार जलाशयों में हर साल उन्नत किस्म के मछली बीज डाल रही है। इसका बहुत सकारात्मक असर देखने को मिला है। साल दो हजार बाईस-तेईस में जलाशयों से पांच सौ उनचास मीट्रिक टन मछली निकली थी। अब दो हजार पच्चीस-छब्बीस में यह आंकड़ा आठ सौ अठारह मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। यह राज्य के मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

कुल उत्पादन बीस हजार मीट्रिक टन के पार

पूरे हिमाचल प्रदेश के कुल मछली उत्पादन में भी उल्लेखनीय उछाल आया है। साल दो हजार चौबीस-पच्चीस में राज्य का कुल मछली उत्पादन उन्नीस हजार उन्नीस मीट्रिक टन दर्ज किया गया था। वहीं साल दो हजार पच्चीस-छब्बीस में यह आंकड़ा बढ़कर बीस हजार पांच मीट्रिक टन हो गया है। यह लगातार हो रही वृद्धि सरकार की विकास पहलों का सीधा परिणाम है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर तेजी से पैदा हो रहे हैं। अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

मत्स्य पालन को लेकर सरकार की भविष्य की योजनाएं

राज्य सरकार मत्स्य पालन क्षेत्र को एक बड़े उद्योग के रूप में विकसित करना चाहती है। इसके लिए नई विपणन प्रणालियां विकसित की जा रही हैं। सरकार का मुख्य लक्ष्य मछुआरों और मछली पालकों के लिए आजीविका के बेहतर और स्थायी साधन तैयार करना है। इन प्रगतिशील नीतिगत उपायों से टिकाऊ मत्स्य पालन को काफी बढ़ावा मिलेगा। इस क्षेत्र में काम करने वाले समुदायों का जीवन स्तर भी सुधरेगा। सरकार आने वाले समय में नई योजनाएं भी जल्द लागू कर सकती है।

सुक्खू सरकार की योजना के मुख्य बिंदु

मछुआरों के लिए लागू की गई इस सरकारी योजना के कुछ मुख्य फायदे इस प्रकार हैं:

  • जलाशयों की मछलियों पर सरकार ने पूरे सौ रुपये एमएसपी तय की है।
  • बाजार कीमत कम मिलने पर बीस रुपये प्रति किलो की नकद सब्सिडी मिलेगी।
  • मछुआरों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे पैसा जमा होगा।
  • सरकार ने मछली रॉयल्टी दर को घटाकर चालू वर्ष में एक प्रतिशत किया।
  • हिमाचल प्रदेश के छह हजार से अधिक मछुआरों को योजना का लाभ मिलेगा।

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